दैनिक वैदिक पंचांग द्रिक सूर्य-सिद्धांत गणना नई दिल्ली (Delhi)

दैनिक वैदिक पंचांग विवरण (२६ नवंबर २०२६)

आज की पावन तिथि, नक्षत्र, सूर्योदय-सूर्यास्त, अभिजित मुहूर्त, अमृत चौघड़िया, राहुकाल एवं नवग्रह गोचर की संपूर्ण वैदिक गणना।

सूर्योदय / सूर्यास्त ०६:५४ AM • ०५:२४ PM
तिथि एवं पक्ष द्वितीया (Dwitiya)
नक्षत्र एवं पद मृगशिरा (Mrigashira) (पद २)
स्थान (City) नई दिल्ली (Delhi)
रीडर थीम:

सूर्य गणना (Solar Times)

सूर्योदय: ०६:५४ AM सूर्यास्त: ०५:२४ PM
दिनमान: १० घंटे ३० मिनट • सूर्य राशि: वृश्चिक (Scorpio)

चंद्र गणना (Lunar Times)

चंद्रोदय: ०७:४२ PM चंद्रास्त: ०७:४२ AM
चंद्र राशि: वृषभ (Taurus) • पक्ष: कृष्ण पक्ष (Krishna Paksha)
आज का पावन वैदिक संकल्प मंत्र (Daily Sankalp)
ॐ तत्सत्। अद्य श्रीब्रह्मणो द्वितीयपरार्धे श्रीश्वेतवाराहकल्पे वैवस्वतमन्वन्तरे अष्टाविंशतितमे कलियुगे कलिप्रथमचरणे जम्बूद्वीपे भारतवर्षे भरतखण्डे आर्यावर्तैकदेशे नई दिल्ली (Delhi) क्षेत्रे संवत्सर विक्रम संवत् २०८३ शाके १९४८ दक्षिणायन (Dakshinayana) शरद (Autumn) अश्विन (Ashvina) मासे कृष्ण पक्ष (Krishna Paksha) द्वितीया (Dwitiya) तिथौ गुरुवार (Guruvara) मृगशिरा (Mrigashira) नक्षत्रे सिद्ध (Siddha) योगे तैतिल (Taitila) करणे मम सकलदुरितक्षयपूर्वकं श्री परमेश्वर प्रीत्यर्थं प्रातः/सायं पूजनं संकल्पं च करिष्ये ॥
(प्रातःकाल स्नान के पश्चात हाथ में जल, अक्षत व पुष्प लेकर यह संकल्प पढ़ें)

पंचांग के पांच मुख्य अंग (Pancha-Angas)

तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण का पूर्ण विवरण
संवत् २०८३
१. तिथि (Tithi) कृष्ण पक्ष
द्वितीया (Dwitiya)
चंद्रमा का सूर्य से कोणीय अंतर: १९७.६°
२. वार (Vara) आकाश (Ether)
गुरुवार (Guruvara)
स्वामी: देवगुरु बृहस्पति / श्री हरि विष्णु | इष्ट: भगवान विष्णु
३. नक्षत्र (Nakshatra) पद २
मृगशिरा (Mrigashira)
स्वामी: मंगल | देवता: चंद्र / सोम
४. योग (Yoga) २७ योग
सिद्ध (Siddha)
सूर्य व चंद्र का संयुक्त भोगांश: २७६.७°
५. करण (Karana) तिथि अर्ध
तैतिल (Taitila)
सक्रिय करण संख्या: ३३ / ६०

☀️ दिन का चौघड़िया (Day Choghadiya)

सूर्योदय से सूर्यास्त तक
शुभ (Shubh) शुभ फलदायी
०६:५४ AM - ०८:१२ AM
विवाह, धार्मिक अनुष्ठान, पूजन हेतु उत्तम
रोग (Rog) अशुभ
०८:१२ AM - ०९:३१ AM
शत्रु बाधा व रोग कारक, सावधानी रखें
उद्वेग (Udveg) अशुभ
०९:३१ AM - १०:५० AM
चिंताकारक, सरकारी कार्य टालें
चर (Char) सामान्य शुभ
१०:५० AM - १२:०९ PM
यात्रा, वाहन व गतिशीलता हेतु उत्तम
लाभ (Laabh) अति शुभ
१२:०९ PM - ०१:२७ PM
व्यापार, धन लाभ व नया सौदा उत्तम
अमृत (Amrit) सर्वश्रेष्ठ
०१:२७ PM - ०२:४६ PM
सर्वोत्तम मुहूर्त, समस्त शुभ कार्य सिद्ध
काल (Kaal) अति अशुभ
०२:४६ PM - ०४:०५ PM
हानिकारक, नया कार्य आरंभ न करें
शुभ (Shubh) शुभ फलदायी
०४:०५ PM - ०५:२४ PM
विवाह, धार्मिक अनुष्ठान, पूजन हेतु उत्तम

🌙 रात्रि का चौघड़िया (Night Choghadiya)

सूर्यास्त से अगले सूर्योदय तक
अमृत (Amrit) सर्वश्रेष्ठ
०५:२४ PM - ०७:०५ PM
सर्वोत्तम मुहूर्त, समस्त शुभ कार्य सिद्ध
काल (Kaal) अति अशुभ
०७:०५ PM - ०८:४६ PM
हानिकारक, नया कार्य आरंभ न करें
शुभ (Shubh) शुभ फलदायी
०८:४६ PM - १०:२७ PM
विवाह, धार्मिक अनुष्ठान, पूजन हेतु उत्तम
रोग (Rog) अशुभ
१०:२७ PM - १२:०९ AM
शत्रु बाधा व रोग कारक, सावधानी रखें
उद्वेग (Udveg) अशुभ
१२:०९ AM - ०१:५० AM
चिंताकारक, सरकारी कार्य टालें
चर (Char) सामान्य शुभ
०१:५० AM - ०३:३१ AM
यात्रा, वाहन व गतिशीलता हेतु उत्तम
लाभ (Laabh) अति शुभ
०३:३१ AM - ०५:१२ AM
व्यापार, धन लाभ व नया सौदा उत्तम
अमृत (Amrit) सर्वश्रेष्ठ
०५:१२ AM - ०६:५४ AM
सर्वोत्तम मुहूर्त, समस्त शुभ कार्य सिद्ध

✨ शुभ मुहूर्त (Auspicious Timings)

अभिजित मुहूर्त सर्वश्रेष्ठ शुभ
११:४५ AM - १२:३३ PM
भगवान श्रीहरि को प्रिय, समस्त शुभ एवं मांगलिक कार्यों के लिए उत्तम।
ब्रह्म मुहूर्त अति पावन
०५:१८ AM - ०६:०६ AM
ईश्वर आराधना, मंत्र जप, प्राणायाम व ध्यान साधना हेतु सर्वोत्तम काल।
विजय मुहूर्त सफलता प्रदाता
०१:१९ PM - ०२:०७ PM
यात्रा, मुकदमे व नवीन उपक्रम में विजय एवं सिद्धि प्राप्ति हेतु उत्तम।
गोधूलि मुहूर्त संध्या काल
०५:०९ PM - ०५:३९ PM
संध्या आरती, दीपदान, तुलसी पूजन व गृह शांति हेतु शुभ समय।

⛔ अशुभ समय (Inauspicious Timings)

राहुकाल (Rahu Kaal) वर्जित
१२:०९ PM - ०१:२७ PM
नवीन कार्य, यात्रा, खरीदारी व मांगलिक कार्य आरंभ कदापि न करें।
यमगण्ड (Yamaganda) अशुभ
०६:५४ AM - ०८:१२ AM
हानिकारक फलदायक समय, महत्वपूर्ण निर्णयों से बचें।
गुलिक काल (Gulika Kaal) मध्यम अशुभ
०९:३१ AM - १०:५० AM
शनि पुत्र गुलिक का समय, सावधानी से कार्य संपन्न करें।

वैदिक पंचांग का गूढ़ रहस्य, विज्ञान एवं उपयोगिता

सनातन काल-गणना एवं ज्योतिषीय सिद्धांत का संपूर्ण ज्ञान

सनातन हिंदू संस्कृति में समय को केवल एक भौतिक मापक नहीं, अपितु साक्षात् भगवान कालस्वरूप महाकाल का दिव्य रूप माना गया है। श्रीमद्भगवद्गीता में भगवान श्री कृष्ण कहते हैं—"कालोऽस्मि लोकक्षयकृत्प्रवृद्धो" (मैं ही लोकों का संहार करने वाला महाकाल हूँ)। वैदिक पंचांग भारतीय खगोल विज्ञान (Astronomy) और पराविद्या (Astrology) का वह अद्वितीय समन्वय है, जो हजारों वर्षों से सूर्य, चंद्रमा और नक्षत्रों की सूक्ष्म गतियों की अचूक गणना करता आ रहा है।

१. पंचांग शब्द का अर्थ और इसके पांच दिव्य अंग

'पंचांग' शब्द संस्कृत के दो शब्दों—'पंच' (पाँच) और 'अंग' (अवयव) से मिलकर बना है। जिस प्रकार मनुष्य के शरीर के पाँच मुख्य अंग होते हैं, उसी प्रकार काल-पुरुष के पांच प्रमुख अंग हैं:

  • १. तिथि (Tithi): सूर्य और चंद्रमा के बीच के १२ अंश (Degrees) के कोणीय अंतर को एक तिथि कहा जाता है। एक चंद्र मास में ३० तिथियां होती हैं (१५ शुक्ल पक्ष और १५ कृष्ण पक्ष)। तिथि व्यक्ति के मानसिक संकल्प और ऊर्जा को नियंत्रित करती है।
  • २. वार (Vara): एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक का समय 'वार' या दिन कहलाता है। सातों वारों के स्वामी क्रमशः सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि हैं। वार शरीर के स्वास्थ्य और जीवन शक्ति को प्रभावित करता है।
  • ३. नक्षत्र (Nakshatra): क्रांतिवृत्त (Ecliptic) के ३६० अंशों को २७ बराबर भागों में बांटा गया है। प्रत्येक भाग १३ अंश २० कला का होता है, जिसे नक्षत्र कहते हैं। नक्षत्र मनुष्य के अवचेतन मन और प्रारब्ध को दिशा देता है।
  • ४. योग (Yoga): सूर्य और चंद्रमा के स्पष्ट भोगांशों के योग को १३ अंश २० कला से भाग देने पर २७ प्रकार के योग प्राप्त होते हैं। योग का प्रभाव जीवन के संबंधों और मानसिक शांति पर पड़ता है।
  • ५. करण (Karana): एक तिथि के आधे भाग (६ अंश) को करण कहते हैं। एक माह में ६० करण होते हैं। करण व्यक्ति की कार्यकुशलता, व्यापार और कर्मफल को निर्धारित करता है।

२. द्रिक गणितीय सूर्य-सिद्धांत का खगोलीय आधार

भक्तिलोक पंचांग आधुनिक नासा (NASA) एफिमरिस और प्राचीन सूर्य-सिद्धांत के द्रिक-प्रत्यक्ष खगोलीय सूत्रों पर आधारित है। इसमें स्थानीय अक्षांश (Latitude) और देशांतर (Longitude) के आधार पर प्रत्येक नगर के लिए सूर्योदय, सूर्यास्त, चंद्रोदय और ग्रहों के स्पष्ट गोचर की सेकंड-दर-सेकंड गणना की जाती है।

३. राहुकाल और शुभ मुहूर्त में भेद

दिन के आठवें भाग को राहुकाल कहा जाता है। खगोल शास्त्र के अनुसार, जब सूर्य की किरणों में कॉस्मिक किरणों का असंतुलन होता है, उस समय नवीन कार्यों की शुरुआत में असफलता की संभावना बढ़ जाती है। वहीं अभिजित मुहूर्त को समस्त दोषों का निवारक माना गया है, जिसमें किया गया कार्य सदा सफल होता है।

संपादकीय एवं खगोलीय प्रमाणिकता:

यह पंचांग वैदिक पंचांग मंडल द्वारा उपलब्ध प्रामाणिक ज्योतिषीय संहिताओं, धर्मसिंधु, निर्णयसिंधु एवं द्रिक खगोलीय गणनाओं के आधार पर दैनिक रूप से सत्यापित किया जाता है। स्थानीय सूर्योदय के अनुसार सूक्ष्म अंतर स्वाभाविक है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (Panchang FAQs)

पंचांग, मुहूर्त एवं चौघड़िया से जुड़े प्रमुख प्रश्न
भक्तिलोक पंचांग पृष्ठ पर ऊपर दिए गए 'पंचांग के पांच मुख्य अंग' कार्ड में आज की सक्रिय तिथि, पक्ष, नक्षत्र, पद और उनके स्वामियों का वास्तविक समय विवरण प्रदर्शित होता है। आप तिथि चयन कैलेंडर से किसी भी दिन का विवरण देख सकते हैं।
राहुकाल के दौरान गृहप्रवेश, विवाह, नवीन व्यवसाय का शुभारंभ, महत्वपूर्ण अनुबंध (Agreements), संपत्ति की खरीदारी और लंबी दूरी की यात्रा आरंभ करना वर्जित माना जाता है। पूर्व से चल रहे नित्य कार्य किए जा सकते हैं।
चौघड़िया में अमृत, लाभ और शुभ मुहूर्त सर्वश्रेष्ठ फलदायी माने जाते हैं। यात्रा हेतु 'चर' चौघड़िया उत्तम है, जबकि 'रोग, काल और उद्वेग' में शुभ कार्य टालने चाहिए।
अभिजित मुहूर्त प्रतिदिन दोपहर के समय लगभग ४८ मिनट का होता है। भगवान विष्णु का यह अत्यंत प्रिय मुहूर्त है, जिसमें समस्त ग्रह दोष निष्प्रभावी हो जाते हैं और किसी भी शुभ कार्य को तुरंत आरंभ किया जा सकता है।