सनातन काल चक्र व गतिशील पंचांग निर्देशिका
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सनातन हिंदू कैलेंडर 2029 (Hindu Calendar)

दैनिक पंचांग, आज की तिथि व शुभ मुहूर्त, सम्पूर्ण २४ एकादशी व्रत सूची, प्रमुख हिंदू पर्व (दिवाली, होली, नवरात्रि, रक्षाबंधन) व व्रत-त्योहारों का संपूर्ण प्रामाणिक संकलन।

संवत वर्ष
विक्रम संवत 2085-2086
शक संवत
शक संवत 1950-1951
एकादशी व्रत
२४ पावन एकादशियां
माह व पक्ष
१२ मास, शुक्ल व कृष्ण
काल गणना
सूर्य-चंद्र समन्वित
फॉन्ट:
थीम:
वर्ष चुनें:
जनवरी 2029
१ जनवरी 2029 पंचांग विवरण विस्तृत पंचांग देखें
तिथि एवं पक्ष (Tithi & Paksha): त्रयोदशी तिथि, शुक्ल पक्ष
नक्षत्र एवं योग (Nakshatra & Yoga): रोहिणी नक्षत्र, ब्रह्म योग
सूर्योदय एवं सूर्यास्त (Sun Timing): सूर्योदय: ०७:१४ AM | सूर्यास्त: ०५:३६ PM
राहुकाल (अशुभ समय): ०१:४५ PM से ०३:०२ PM
व्रत, पर्व एवं विशेष मुहूर्त: प्रदोष व्रत, नववर्ष शुभारंभ।

वर्ष 2029 के प्रमुख हिंदू त्योहार

सनातन पंचांग के अनुसार वर्ष 2029 में मनाए जाने वाले सभी प्रमुख धार्मिक पर्वों की प्रामाणिक सूची:

त्योहार / पर्व दिनांक (2029) वार (दिन) हिंदू तिथि व मास धार्मिक महत्व व विशेषता

वर्ष 2029 की सम्पूर्ण २४ एकादशी तिथियां

भगवान श्रीहरि विष्णु को समर्पित वर्ष 2029 की समस्त २४ एकादशियों के नाम, मास, पक्ष और व्रत दिनांक:

एकादशी का नाम मास एवं पक्ष दिनांक (2029) व्रत का आध्यात्मिक फल

पंचांग के ५ मुख्य अंग (The 5 Pillars of Panchang)

वैदिक ज्योतिष में काल गणना हेतु पंचांग के पाँच अंगों का अध्ययन किया जाता है। इन्हीं पाँच घटकों के समन्वय से किसी भी समय का शुभ या अशुभ प्रभाव निर्धारित होता है:

१. तिथि

सूर्य और चंद्रमा के बीच १२° के कोणीय अंतर को तिथि कहते हैं। माह में ३० तिथियां (१५ शुक्ल + १५ कृष्ण) होती हैं।

२. वार

सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक का काल एक वार (दिन) कहलाता है। सात ग्रहों के नाम पर ७ वार होते हैं।

३. नक्षत्र

३६०° आकाश मंडल को २७ नक्षत्रों में बाँटा गया है। चंद्रमा प्रतिदिन एक नक्षत्र में भ्रमण करता है।

४. योग

सूर्य-चंद्रमा के स्पष्ट भोगांश के योग से २७ योग (विष्कुंभ, प्रीति, आयुष्मान, सौभाग्य आदि) बनते हैं।

५. करण

एक तिथि का आधा भाग (६° अंतर) करण कहलाता है। कुल ११ करण (७ चर व ४ स्थिर) होते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

सनातन हिंदू कैलेंडर सूर्य और चंद्रमा दोनों की गतियों पर आधारित 'सूर्य-चंद्र समन्वित' (Lunisolar) काल गणना प्रणाली पर आधारित है। इसमें चंद्रमा के आधार पर तिथियां व मास (शुक्ल व कृष्ण पक्ष) निर्धारित होते हैं और सौर संक्रांति के आधार पर ऋतुओं व वर्ष का संतुलन बनाया जाता है।

पंचांग के पाँच मूल अंग हैं: १. तिथि (चंद्र दिवस), २. वार (सप्ताह का दिन), ३. नक्षत्र (चंद्रमा की तारामंडल स्थिति - २७ नक्षत्र), ४. योग (सूर्य-चंद्रमा का कोणीय योग - २७ योग), और ५. करण (तिथि का आधा भाग - ११ करण)।

चंद्र वर्ष (३५४ दिन) और सौर वर्ष (३६५ दिन) के बीच लगभग ११ दिनों का अंतर होता है। इस अंतर को संतुलित करने हेतु प्रत्येक ३२ माह १६ दिन में एक अतिरिक्त माह जोड़ा जाता है, जिसे 'अधिकमास' या 'पुरुषोत्तम मास' कहते हैं।

एकादशी व्रत भगवान श्रीहरि विष्णु की आराधना का सर्वोत्कृष्ट दिन है। एक सामान्य वर्ष में २४ एकादशियां (प्रत्येक माह में २ - कृष्ण पक्ष व शुक्ल पक्ष) होती हैं। यह व्रत शारीरिक शुद्धि, मानसिक शांति और मोक्ष प्राप्ति हेतु अमोघ माना गया है।
संपादकीय पारदर्शिता एवं ज्योतिषीय संदर्भ:

यह कैलेंडर सूर्य सिद्धांत, द्रिक गणित पंचांग तथा प्रतिष्ठित भारतीय पंचांगों के उपलब्ध संदर्भों के आधार पर शोधकर्ताओं द्वारा निष्पक्ष रूप से तैयार किया गया है। स्थानीय सूर्योदय समय और भौगोलिक अक्षांश-देशांतर के आधार पर विभिन्न शहरों में तिथियों के प्रारंभ और समाप्ति समय में कुछ मिनटों का अंतर संभव है।

2029 के प्रमुख पर्व

दैनिक प्रातः स्मरण श्लोक

कराग्रे वसते लक्ष्मीः करमध्ये सरस्वती ।
करमूले तु गोविन्दः प्रभाते करदर्शनम् ॥

प्रतिदिन प्रातःकाल हथेलियों का दर्शन करते हुए यह श्लोक पढ़ने से दिन मंगलमय व शुभ होता है।