पुरुषोत्तम योग (Purushottama Yoga) – श्लोक 6
श्लोक ६ में भगवान कहते हैं कि उनका परम धाम सूर्य, चन्द्र या अग्नि से प्रकाशित नहीं होता, और वहाँ जाने के बाद लौटना नहीं होता।
संस्कृत श्लोक
न तद्भासयते सूर्यो न शशाङ्को न पावकः । यद्गत्वा न निवर्तन्ते तद्धाम परमं मम ॥ ६॥
na tad bhāsayate sūryo na śaśāṅko na pāvakaḥ | yad gatvā na nivartante tad dhāma paramaṃ mama ||6||
पदच्छेद / शब्दार्थ
न: नहीं; तत्: उस (परम धाम) को; भासयते: प्रकाशित करता; सूर्यः: सूर्य; न: नहीं; शशाङ्कः: चन्द्रमा; न: नहीं; पावकः: अग्नि; यत्: जहाँ; गत्वा: जाकर; न: नहीं; निवर्तन्ते: लौटते; तत्: वह; धाम: धाम; परमम्: परम; मम: मेरा।
हिंदी अनुवाद
उस मेरे परम धाम को न सूर्य प्रकाशित करता है, न चन्द्रमा और न अग्नि। जहाँ जाने के बाद (जीव) लौटकर नहीं आते।
English Translation
That supreme abode of Mine is not illumined by the sun or moon, nor by fire. Having gone there, they never return.
टीका / Commentary
यह श्लोक परमात्मा के धाम (वैकुण्ठ, ब्रह्मलोक आदि) का वर्णन करता है। वहाँ न सूर्य, चन्द्र, अग्नि का प्रकाश आवश्यक है, क्योंकि वह स्वयंप्रकाश है। वहाँ जाने के बाद जीव जन्म-मरण के चक्र में नहीं लौटता।