पुरुषोत्तम योग (Purushottama Yoga) – श्लोक 12
श्लोक १२ में भगवान कहते हैं कि सूर्य, चन्द्रमा और अग्नि का तेज उन्हीं का है, जो सम्पूर्ण जगत को प्रकाशित करता है।
संस्कृत श्लोक
यदादित्यगतं तेजो जगद्भासयतेऽखिलम् । यच्चन्द्रमसि यच्चाग्नौ तत्तेजो विद्धि मामकम् ॥ १२॥
yad āditya-gataṃ tejo jagad bhāsayate 'khilam | yac candramasi yac cāgnau tat tejo viddhi māmakam ||12||
पदच्छेद / शब्दार्थ
यत्: जो; आदित्यगतम्: सूर्य में स्थित; तेजः: तेज; जगत्: संसार को; भासयते: प्रकाशित करता है; अखिलम्: सम्पूर्ण; यत्: जो; चन्द्रमसि: चन्द्रमा में; यत्: जो; च: और; अग्नौ: अग्नि में; तत्: उस; तेजः: तेज को; विद्धि: जानो; मामकम्: मेरा।
हिंदी अनुवाद
जो तेज सूर्य में स्थित है और सम्पूर्ण जगत को प्रकाशित करता है, जो चन्द्रमा में है और जो अग्नि में है – उस तेज को मेरा ही जानो।
English Translation
The light that is in the sun and illumines the whole world, the light that is in the moon and in the fire – know that light to be Mine.
टीका / Commentary
भगवान कृष्ण कहते हैं कि सूर्य, चन्द्रमा और अग्नि का तेज वास्तव में उन्हीं का है। वे सभी प्रकाश के स्रोतों के मूल हैं। यह उनकी विभूति है।