क्षेत्र क्षेत्रज्ञ विभाग योग (Kshetra Kshetragya Vibhag Yoga) – श्लोक 8
श्लोक ८ में ज्ञान प्राप्ति के साधनों के प्रथम नौ गुण बताए गए हैं।
संस्कृत श्लोक
अमानित्वमदम्भित्वमहिंसा क्षान्तिरार्जवम् | आचार्योपासनं शौचं स्थैर्यमात्मविनिग्रहः || ८ ||
amānitvamadambhitvamahiṃsā kṣāntirārjavam | ācāryopāsanaṃ śaucaṃ sthairyamātmavinigrahaḥ || 8 ||
पदच्छेद / शब्दार्थ
अमानित्वम्: मान का अभाव; अदम्भित्वम्: दम्भ का अभाव; अहिंसा: अहिंसा; क्षान्ति: सहनशीलता; आर्जवम्: सरलता; आचार्योपासनम्: आचार्य की सेवा; शौचम्: पवित्रता; स्थैर्यम्: स्थिरता; आत्मविनिग्रह: मन का निग्रह
हिंदी अनुवाद
मान का अभाव (अमानित्व), दम्भ का अभाव, अहिंसा, क्षमा, सरलता, आचार्य की सेवा, शौच, स्थिरता और आत्म-निग्रह –
English Translation
Humility, unpretentiousness, non-injury, forgiveness, uprightness, service of the teacher, purity, steadfastness, self-control.
टीका / Commentary
अब ज्ञान के साधनों का वर्णन शुरू होता है। ये सद्गुण ज्ञान प्राप्ति के लिए आवश्यक हैं। Now begins the description of the means to knowledge. These virtues are necessary for attaining wisdom.