क्षेत्र क्षेत्रज्ञ विभाग योग (Kshetra Kshetragya Vibhag Yoga) – श्लोक 6

श्लोक ६ में क्षेत्र के तत्वों की गणना शुरू होती है: महाभूत, अहंकार, बुद्धि आदि।

संस्कृत श्लोक

महाभूतान्यहङ्कारो बुद्धिरव्यक्तमेव च | इन्द्रियाणि दशैकं च पञ्च चेन्द्रियगोचराः || ६ ||

mahābhūtānyahaṅkāro buddhirvyaktameva ca | indriyāṇi daśaikaṃ ca pañca cendriyagocarāḥ || 6 ||

पदच्छेद / शब्दार्थ

महाभूतानि: पंच महाभूत; अहङ्कार: अहंकार; बुद्धि: बुद्धि; अव्यक्तम्: अव्यक्त (मूल प्रकृति); एव: ही; च: और; इन्द्रियाणि: इन्द्रियाँ; दश: दस; एकम्: एक (मन); च: तथा; पञ्च: पाँच; च: और; इन्द्रियगोचरा: इन्द्रियों के विषय

हिंदी अनुवाद

पंच महाभूत, अहंकार, बुद्धि और अव्यक्त (मूल प्रकृति), दस इन्द्रियाँ, एक (मन) तथा पाँच इन्द्रियों के विषय –

English Translation

The great elements, egoism, intellect, and also the unmanifested (Mula-Prakriti), the ten senses and the one (mind), and the five objects of the senses.

टीका / Commentary

यह श्लोक क्षेत्र (शरीर) के घटकों की गणना प्रारम्भ करता है। इसमें स्थूल और सूक्ष्म तत्वों का उल्लेख है। This verse begins listing the constituents of the field (body), including gross and subtle elements.