क्षेत्र क्षेत्रज्ञ विभाग योग (Kshetra Kshetragya Vibhag Yoga) – श्लोक 26
श्लोक २६ में बताया गया है कि जो लोग दूसरों से सुनकर श्रद्धापूर्वक उपासना करते हैं, वे भी मृत्यु से पार हो जाते हैं।
संस्कृत श्लोक
अन्ये त्वेवमजानन्तः श्रुत्वान्येभ्य उपासते | तेऽपि चातितरन्त्येव मृत्युं श्रुतिपरायणाः || २६ ||
anye tvevamajānantaḥ śrutvānyebhya upāsate | te'pi cātitarantyeva mṛtyuṃ śrutiparāyaṇāḥ || 26 ||
पदच्छेद / शब्दार्थ
अन्ये: अन्य; तु: तो; एवम्: इस प्रकार; अजानन्त: न जानते हुए; श्रुत्वा: सुनकर; अन्येभ्य: दूसरों से; उपासते: उपासना करते हैं; ते: वे; अपि: भी; च: और; अतितरन्ति: पार हो जाते हैं; एव: ही; मृत्युम्: मृत्यु से; श्रुतिपरायणा: श्रवण में तत्पर
हिंदी अनुवाद
किन्तु अन्य लोग, जो इस प्रकार नहीं जानते, दूसरों से सुनकर ही उपासना करते हैं। वे भी श्रवण में तत्पर होकर मृत्यु से पार हो जाते हैं।
English Translation
Others, however, not knowing thus, worship as they have heard from others. Even these cross beyond death by their devotion to what they have heard.
टीका / Commentary
यहाँ उन साधकों का उल्लेख है जो श्रद्धापूर्वक गुरु या शास्त्र से सुने हुए मार्ग का अनुसरण करते हैं और मुक्ति प्राप्त करते हैं। This refers to those who follow the path heard from others with faith and attain liberation.