क्षेत्र क्षेत्रज्ञ विभाग योग (Kshetra Kshetragya Vibhag Yoga) – श्लोक 25
श्लोक २५ में आत्मा को देखने के तीन मार्ग बताए गए हैं – ध्यान, ज्ञान और कर्म।
संस्कृत श्लोक
ध्यानेनात्मनि पश्यन्ति केचिदात्मानमात्मना | अन्ये साङ्ख्येन योगेन कर्मयोगेन चापरे || २५ ||
dhyānenātmani paśyanti kecidātmānamātmanā | anye sāṅkhyena yogena karmayogena cāpare || 25 ||
पदच्छेद / शब्दार्थ
ध्यानेन: ध्यान द्वारा; आत्मनि: अपने में; पश्यन्ति: देखते हैं; केचित्: कुछ लोग; आत्मानम्: आत्मा को; आत्मना: अपने मन से; अन्ये: अन्य; साङ्ख्येन: सांख्य योग से; योगेन: योग द्वारा; कर्मयोगेन: कर्मयोग से; च: और; अपरे: दूसरे
हिंदी अनुवाद
कुछ लोग ध्यान द्वारा अपने मन से अपने में आत्मा को देखते हैं, अन्य लोग सांख्ययोग द्वारा और दूसरे लोग कर्मयोग द्वारा।
English Translation
Some by meditation behold the Self in the self through the self; others by the Yoga of knowledge; and others by the Yoga of action.
टीका / Commentary
यहाँ आत्मसाक्षात्कार के तीन मार्ग बताए गए हैं – ध्यानयोग, सांख्ययोग और कर्मयोग। Three paths to self-realization are mentioned here: meditation, knowledge, and action.