क्षेत्र क्षेत्रज्ञ विभाग योग (Kshetra Kshetragya Vibhag Yoga) – श्लोक 24

श्लोक २४ में कहा गया है कि पुरुष और प्रकृति के यथार्थ ज्ञाता को पुनर्जन्म नहीं होता।

संस्कृत श्लोक

य एवं वेत्ति पुरुषं प्रकृतिं च गुणैः सह | सर्वथा वर्तमानोऽपि न स भूयोऽभिजायते || २४ ||

ya evaṃ vetti puruṣaṃ prakṛtiṃ ca guṇaiḥ saha | sarvathā vartamāno'pi na sa bhūyo'bhijāyate || 24 ||

पदच्छेद / शब्दार्थ

य: जो; एवम्: इस प्रकार; वेत्ति: जानता है; पुरुषम्: पुरुष को; प्रकृतिम्: प्रकृति को; च: और; गुणै: गुणों के साथ; सह: सहित; सर्वथा: सब प्रकार से; वर्तमान: बर्ताव करता हुआ; अपि: भी; न: नहीं; स: वह; भूय: फिर; अभिजायते: जन्मता

हिंदी अनुवाद

जो इस प्रकार पुरुष और प्रकृति को गुणों सहित जान लेता है, वह सब प्रकार से बर्ताव करता हुआ भी फिर जन्म नहीं पाता।

English Translation

He who thus knows the Purusha and Prakriti together with the qualities, whatever way he may live, he is not born again.

टीका / Commentary

यह ज्ञान मुक्तिदायक है। इस ज्ञान को प्राप्त व्यक्ति कैसा भी जीवन जिए, वह पुनर्जन्म से मुक्त हो जाता है। This knowledge is liberating. One who possesses it is freed from rebirth, regardless of how he lives.