क्षेत्र क्षेत्रज्ञ विभाग योग (Kshetra Kshetragya Vibhag Yoga) – श्लोक 23

श्लोक २३ में परमात्मा के साक्षी, अनुमन्ता, भर्ता, भोक्ता, महेश्वर और परमात्मा नामों का वर्णन है।

संस्कृत श्लोक

उपद्रष्टाऽनुमन्ता च भर्ता भोक्ता महेश्वरः | परमात्मेति चाप्युक्तो देहेऽस्मिन्पुरुषः परः || २३ ||

upadraṣṭā'numantā ca bhartā bhoktā maheśvaraḥ | paramātmeti cāpyukto dehe'sminpuruṣaḥ paraḥ || 23 ||

पदच्छेद / शब्दार्थ

उपद्रष्टा: साक्षी; अनुमन्ता: अनुमति देने वाला; च: और; भर्ता: पालन करने वाला; भोक्ता: भोक्ता; महेश्वर: महेश्वर; परमात्मा: परमात्मा; इति: इस प्रकार; च: भी; अपि: और; उक्त: कहा गया; देहे: शरीर में; अस्मिन्: इस; पुरुष: पुरुष; पर: परम

हिंदी अनुवाद

इस शरीर में स्थित यह परम पुरुष उपद्रष्टा (साक्षी), अनुमन्ता, भर्ता, भोक्ता, महेश्वर और परमात्मा भी कहा गया है।

English Translation

The Supreme Purusha in this body is also called the Witness, the Permitter, the Supporter, the Experiencer, the Great Lord, and the Supreme Self.

टीका / Commentary

परमात्मा के विभिन्न नाम उसके विभिन्न कार्यों का बोध कराते हैं – वह साक्षी है, अनुमति देने वाला है, पालनकर्ता है, भोक्ता है, स्वामी है और परम आत्मा है। The various names of the Supreme indicate His different functions: witness, permitter, supporter, experiencer, Lord, and Supreme Self.