राज विद्या राज गुह्य योग (Raja Vidya Raja Guhya Yoga) – श्लोक 9

श्लोक ९ में भगवान कहते हैं कि वे कर्मों से बँधते नहीं, क्योंकि वे अनासक्त हैं। Verse 9: The Lord remains unattached to actions.

संस्कृत श्लोक

न च मां तानि कर्माणि निबध्नन्ति धनञ्जय | उदासीनवदासीनमसक्तं तेषु कर्मसु || ९||

na ca māṃ tāni karmāṇi nibadhnanti dhanañjaya | udāsīna-vad āsīnam asaktaṃ teṣu karmasu ||9||

पदच्छेद / शब्दार्थ

न: नहीं; च: और; माम्: मुझे; तानि: वे; कर्माणि: कर्म; निबध्नन्ति: बाँधते हैं; धनञ्जय: हे धनञ्जय (अर्जुन); उदासीन-वत्: उदासीन के समान; आसीनम्: स्थित; असक्तम्: आसक्ति रहित; तेषु: उनमें; कर्मसु: कर्मों में।

हिंदी अनुवाद

हे धनञ्जय! वे कर्म मुझे नहीं बाँधते, क्योंकि मैं उन कर्मों में आसक्ति रहित, उदासीन के समान स्थित हूँ।

English Translation

O Dhananjaya, these actions do not bind Me, for I remain like one indifferent, unattached to those actions.

टीका / Commentary

भगवान सृष्टि के कर्ता होते हुए भी उनसे अनासक्त रहते हैं। वे कर्मों के फल से प्रभावित नहीं होते। यही ईश्वर की निर्लिप्तता है।