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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 9 · श्लोक 28

अध्याय 9 · श्लोक 28

राज विद्या राज गुह्य योग (Raja Vidya Raja Guhya Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

शुभाशुभफलैरेवं मोक्ष्यसे कर्मबन्धनैः | संन्यासयोगयुक्तात्मा विमुक्तो मामुपैष्यसि || २८||

śubhāśubha-phalair evaṃ mokṣyase karma-bandhanaiḥ | sannyāsa-yoga-yuktātmā vimukto mām upaiṣyasi ||28||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

शुभ-अशुभ-फलैः: शुभ और अशुभ फलों से; एवम्: इस प्रकार; मोक्ष्यसे: तू मुक्त हो जाएगा; कर्म-बन्धनैः: कर्मों के बन्धनों से; संन्यास-योग-युक्त-आत्मा: संन्यासयोग से युक्त चित्त वाला; विमुक्तः: मुक्त होकर; माम्: मुझे; उपैष्यसि: प्राप्त होगा।

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

इस प्रकार तू शुभाशुभ फलों वाले कर्म-बन्धनों से मुक्त हो जाएगा। संन्यासयोग से युक्त चित्त होकर मुक्त हो तू मुझे प्राप्त होगा।

English Translation

Thus you will be freed from the bondage of actions and their good and evil fruits. With your mind thus fixed on the yoga of renunciation, you will be liberated and come to Me.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

सब कर्म भगवान को अर्पित करने से फल-बन्धन नहीं रहता। यही सच्चा संन्यास (त्याग) है। इस प्रकार मुक्त होकर भक्त भगवान को प्राप्त होता है।
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।