राज विद्या राज गुह्य योग (Raja Vidya Raja Guhya Yoga) – श्लोक 26

श्लोक २६ में भगवान कहते हैं कि वे भक्तिपूर्वक अर्पित पत्र-पुष्प आदि स्वीकार करते हैं। Verse 26: The Lord accepts a leaf, flower, fruit, or water offered with devotion.

संस्कृत श्लोक

पत्रं पुष्पं फलं तोयं यो मे भक्त्या प्रयच्छति | तदहं भक्त्युपहृतमश्नामि प्रयतात्मनः || २६||

patraṃ puṣpaṃ phalaṃ toyaṃ yo me bhaktyā prayacchati | tad ahaṃ bhakty-upahṛtam aśnāmi prayatātmanaḥ ||26||

पदच्छेद / शब्दार्थ

पत्रम्: पत्ता; पुष्पम्: फूल; फलम्: फल; तोयम्: जल; यः: जो; मे: मुझे; भक्त्या: भक्ति से; प्रयच्छति: अर्पित करता है; तत्: उसे; अहम्: मैं; भक्ति-उपहृतम्: भक्तिपूर्वक अर्पित; अश्नामि: स्वीकार करता हूँ; प्रयत-आत्मनः: शुद्ध चित्त वाले (भक्त) का।

हिंदी अनुवाद

जो कोई भक्ति से मुझे पत्र, पुष्प, फल या जल अर्पण करता है, उस प्रयतचित्त (शुद्ध हृदय) भक्त का वह भक्तिपूर्वक अर्पित किया हुआ पदार्थ मैं स्वीकार करता हूँ।

English Translation

If one offers Me with love and devotion a leaf, a flower, a fruit, or water, I accept that offering from the pure-hearted.

टीका / Commentary

यह अत्यन्त महत्वपूर्ण श्लोक है जो भक्ति की सरलता और सर्वसुलभता को दर्शाता है। भगवान को महँगे भोग नहीं, बल्कि प्रेमपूर्वक अर्पित किया हुआ तुच्छ से तुच्छ पदार्थ भी प्रिय है।