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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 9 · श्लोक 25

अध्याय 9 · श्लोक 25

राज विद्या राज गुह्य योग (Raja Vidya Raja Guhya Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

यान्ति देवव्रता देवान्पितृ़न्यान्ति पितृव्रताः | भूतानि यान्ति भूतेज्या यान्ति मद्याजिनोऽपि माम् || २५||

yānti deva-vratā devān pitṝn yānti pitṛ-vratāḥ | bhūtāni yānti bhūtejyā yānti mad-yājino 'pi mām ||25||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

यान्ति: जाते हैं; देव-व्रता: देवताओं के उपासक; देवान्: देवताओं को; पितृ़न्: पितरों को; यान्ति: जाते हैं; पितृ-व्रताः: पितरों के उपासक; भूतानि: भूत-प्रेत; यान्ति: जाते हैं; भूत-इज्याः: भूतों की पूजा करने वाले; यान्ति: जाते हैं; मत्-याजिनः: मेरे उपासक; अपि: भी; माम्: मुझे।

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

देवताओं के उपासक देवताओं को जाते हैं, पितरों के उपासक पितरों को, भूतों की पूजा करने वाले भूतों को जाते हैं, और मेरे उपासक मुझे ही प्राप्त होते हैं।

English Translation

Those who worship the gods go to the gods; those who worship the ancestors go to the ancestors; those who worship the ghosts go to the ghosts; but those who worship Me come to Me.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

यह श्लोक उपासना के फल में भेद दिखाता है। जैसी भावना, वैसी प्राप्ति। भगवान के उपासकों को सर्वोच्च फल मिलता है।
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।