राज विद्या राज गुह्य योग (Raja Vidya Raja Guhya Yoga) – श्लोक 24

श्लोक २४ में भगवान स्वयं को सभी यज्ञों का भोक्ता और स्वामी बताते हैं। Verse 24: The Lord is the true enjoyer of all sacrifices.

संस्कृत श्लोक

अहं हि सर्वयज्ञानां भोक्ता च प्रभुरेव च | न तु मामभिजानन्ति तत्त्वेनातश्च्यवन्ति ते || २४||

ahaṃ hi sarva-yajñānāṃ bhoktā ca prabhur eva ca | na tu mām abhijānanti tattvenātaś cyavanti te ||24||

पदच्छेद / शब्दार्थ

अहम्: मैं; हि: निश्चय ही; सर्व-यज्ञानाम्: सब यज्ञों का; भोक्ता: भोक्ता; च: और; प्रभु: स्वामी; एव: ही; च: भी; न: नहीं; तु: परन्तु; माम्: मुझे; अभिजानन्ति: जानते हैं; तत्त्वेन: तत्त्व से; अतः: इसलिए; च्यवन्ति: गिर जाते हैं; ते: वे।

हिंदी अनुवाद

क्योंकि मैं ही सब यज्ञों का भोक्ता और प्रभु हूँ। परन्तु वे मुझे तत्त्व से नहीं जानते, इसलिए (स्वर्ग से) गिर जाते हैं।

English Translation

For I alone am the enjoyer and the Lord of all sacrifices. But they do not know Me in truth; therefore they fall (from the heavenly path).

टीका / Commentary

भगवान ही सब यज्ञों के फल के भोक्ता और स्वामी हैं। जो यह नहीं जानते, वे यज्ञों के सीमित फल (स्वर्ग) को भोगकर पुनः गिर जाते हैं।