राज विद्या राज गुह्य योग (Raja Vidya Raja Guhya Yoga) – श्लोक 20

श्लोक २० में वैदिक कर्मकाण्डियों का वर्णन है जो स्वर्ग के लिए यज्ञ करते हैं। Verse 20: Those who perform Vedic sacrifices seek heaven.

संस्कृत श्लोक

त्रैविद्या मां सोमपाः पूतपापा यज्ञैरिष्ट्वा स्वर्गतिं प्रार्थयन्ते | ते पुण्यमासाद्य सुरेन्द्रलोकमश्नन्ति दिव्यान्दिवि देवभोगान् || २०||

trai-vidyā māṃ soma-pāḥ pūta-pāpā yajñair iṣṭvā svarga-gatiṃ prārthayante | te puṇyam āsādya surendra-lokam aśnanti divyān divi deva-bhogān ||20||

पदच्छेद / शब्दार्थ

त्रै-विद्या: तीनों वेदों के जानने वाले; माम्: मेरी; सोम-पाः: सोमपान करने वाले; पूत-पापाः: पापों से मुक्त; यज्ञैः: यज्ञों द्वारा; इष्ट्वा: पूजा करके; स्वर्ग-गतिम्: स्वर्ग की प्राप्ति; प्रार्थयन्ते: प्रार्थना करते हैं; ते: वे; पुण्यम्: पुण्यमय; आसाद्य: प्राप्त करके; सुरेन्द्र-लोकम्: इन्द्रलोक को; अश्नन्ति: भोगते हैं; दिव्यान्: दिव्य; दिवि: स्वर्ग में; देव-भोगान्: देवताओं के भोग।

हिंदी अनुवाद

तीनों वेदों को जानने वाले, सोमपान करने वाले, पापों से मुक्त हुए (कर्मकाण्डी) लोग यज्ञों द्वारा मेरी पूजा करके स्वर्ग की प्राप्ति की कामना करते हैं। वे पुण्य का फल पाकर इन्द्रलोक में प्रवेश कर वहाँ दिव्य देवताओं के भोगों को भोगते हैं।

English Translation

Those who study the three Vedas and drink the soma, being purified of sins, worship Me through sacrifices and pray for the heavenly goal. They reach the world of Indra and enjoy divine celestial pleasures.

टीका / Commentary

यहाँ कर्मकाण्डी वैदिक साधकों का वर्णन है जो यज्ञ करके स्वर्ग की कामना करते हैं। वे भगवान की अप्रत्यक्ष रूप से पूजा करते हैं, किन्तु सकाम भाव से।