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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 9 · श्लोक 2

अध्याय 9 · श्लोक 2

राज विद्या राज गुह्य योग (Raja Vidya Raja Guhya Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

राजविद्या राजगुह्यं पवित्रमिदमुत्तमम् | प्रत्यक्षावगमं धर्म्यं सुसुखं कर्तुमव्ययम् || २||

rāja-vidyā rāja-guhyaṃ pavitram idam uttamam | pratyakṣāvagamaṃ dharmyaṃ su-sukhaṃ kartum avyayam ||2||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

राज-विद्या: राजविद्या (श्रेष्ठ विद्या); राज-गुह्यम्: राजगुह्य (श्रेष्ठ गोपनीय); पवित्रम्: पवित्र करने वाला; इदम्: यह; उत्तमम्: उत्तम; प्रत्यक्ष-अवगमम्: प्रत्यक्ष अनुभव होने वाला; धर्म्यम्: धर्मयुक्त; सु-सुखम्: अत्यन्त सुखपूर्वक; कर्तुम्: करने को; अव्ययम्: अविनाशी।

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

यह (ज्ञान) राजविद्या (विद्याओं का राजा) है, राजगुह्य (रहस्यों का राजा) है, अत्यन्त पवित्र करने वाला है, उत्तम है, प्रत्यक्ष अनुभव में आने वाला है, धर्मयुक्त है, साधन में अत्यन्त सुखद है और अविनाशी है।

English Translation

This is the king of knowledge, the king of secrets, the supreme purifier, directly realizable, righteous, very easy to practice, and imperishable.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

इस श्लोक में भगवान उस ज्ञान की महिमा का वर्णन करते हैं। इसे "राजविद्या" कहा गया है – सभी विद्याओं में श्रेष्ठ। यह ज्ञान न केवल सैद्धांतिक है, बल्कि प्रत्यक्ष अनुभव किया जा सकता है, और इसका पालन करना अत्यंत सुखद है।
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।