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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 9 · श्लोक 1

अध्याय 9 · श्लोक 1

राज विद्या राज गुह्य योग (Raja Vidya Raja Guhya Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

श्रीभगवानुवाच | इदं तु ते गुह्यतमं प्रवक्ष्याम्यनसूयवे | ज्ञानं विज्ञानसहितं यज्ज्ञात्वा मोक्ष्यसेऽशुभात् || १||

śrī-bhagavān uvāca idaṃ tu te guhyatamaṃ pravakṣyāmy anasūyave jñānaṃ vijñāna-sahitaṃ yaj jñātvā mokṣyase 'śubhāt

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

श्रीभगवान्: भगवान ने; उवाच: कहा; इदम्: यह; तु: तो; ते: तुम्हें; गुह्यतमम्: अति गोपनीय; प्रवक्ष्यामि: कहूँगा; अनसूयवे: दोषदृष्टि न रखने वाले को; ज्ञानम्: ज्ञान; विज्ञान-सहितम्: विज्ञान (अनुभव) सहित; यत्: जिसे; ज्ञात्वा: जानकर; मोक्ष्यसे: तू मुक्त हो जाएगा; अशुभात्: अशुभ (संसार-बन्धन) से।

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

श्री भगवान् बोले: तू निंदारहित है, इसलिये तुझको मैं विज्ञान सहित इस ज्ञान को जो कि सबसे अधिक गोपनीय है, अब कहूँगा, जिसको जानकर तू अशुभ से मुक्त हो जायेगा।

English Translation

The Blessed Lord said: I shall now declare to you, who does not cavil, the most profound knowledge combined with realization, having known which you will be freed from evil.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

भगवान कृष्ण अर्जुन को सबसे गोपनीय ज्ञान देने का वचन देते हैं। "अनसूयवे" का अर्थ है जो ईर्ष्या या आलोचना से मुक्त हो। ऐसा व्यक्ति ही इस ज्ञान को ग्रहण करने का अधिकारी है।
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।