राज विद्या राज गुह्य योग (Raja Vidya Raja Guhya Yoga) – श्लोक 1
श्लोक १ में भगवान अर्जुन को अति गोपनीय ज्ञान देने का वचन देते हैं। Verse 1: The Lord promises to impart the most confidential knowledge to Arjuna.
संस्कृत श्लोक
श्रीभगवानुवाच | इदं तु ते गुह्यतमं प्रवक्ष्याम्यनसूयवे | ज्ञानं विज्ञानसहितं यज्ज्ञात्वा मोक्ष्यसेऽशुभात् || १||
śrī-bhagavān uvāca idaṃ tu te guhyatamaṃ pravakṣyāmy anasūyave jñānaṃ vijñāna-sahitaṃ yaj jñātvā mokṣyase 'śubhāt
पदच्छेद / शब्दार्थ
श्रीभगवान्: भगवान ने; उवाच: कहा; इदम्: यह; तु: तो; ते: तुम्हें; गुह्यतमम्: अति गोपनीय; प्रवक्ष्यामि: कहूँगा; अनसूयवे: दोषदृष्टि न रखने वाले को; ज्ञानम्: ज्ञान; विज्ञान-सहितम्: विज्ञान (अनुभव) सहित; यत्: जिसे; ज्ञात्वा: जानकर; मोक्ष्यसे: तू मुक्त हो जाएगा; अशुभात्: अशुभ (संसार-बन्धन) से।
हिंदी अनुवाद
श्री भगवान् बोले: तू निंदारहित है, इसलिये तुझको मैं विज्ञान सहित इस ज्ञान को जो कि सबसे अधिक गोपनीय है, अब कहूँगा, जिसको जानकर तू अशुभ से मुक्त हो जायेगा।
English Translation
The Blessed Lord said: I shall now declare to you, who does not cavil, the most profound knowledge combined with realization, having known which you will be freed from evil.
टीका / Commentary
भगवान कृष्ण अर्जुन को सबसे गोपनीय ज्ञान देने का वचन देते हैं। "अनसूयवे" का अर्थ है जो ईर्ष्या या आलोचना से मुक्त हो। ऐसा व्यक्ति ही इस ज्ञान को ग्रहण करने का अधिकारी है।