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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 9 · श्लोक 18

अध्याय 9 · श्लोक 18

राज विद्या राज गुह्य योग (Raja Vidya Raja Guhya Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

गतिर्भर्ता प्रभुः साक्षी निवासः शरणं सुहृत् | प्रभवः प्रलयः स्थानं निधानं बीजमव्ययम् || १८||

gatir bhartā prabhuḥ sākṣī nivāsaḥ śaraṇaṃ suhṛt | prabhavaḥ pralayaḥ sthānaṃ nidhānaṃ bījam avyayam ||18||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

गति: गति (लक्ष्य); भर्ता: भर्ता (धारण करने वाला); प्रभुः: प्रभु (स्वामी); साक्षी: साक्षी; निवासः: निवास; शरणम्: शरण; सुहृत्: सुहृद् (मित्र); प्रभवः: उत्पत्ति; प्रलयः: प्रलय; स्थानम्: स्थान; निधानम्: निधान (आश्रय); बीजम्: बीज; अव्ययम्: अविनाशी।

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

मैं गति (परम लक्ष्य) हूँ, भर्ता (धारण करने वाला) हूँ, प्रभु हूँ, साक्षी हूँ, निवास हूँ, शरण हूँ, सुहृत् (हितैषी) हूँ, उत्पत्ति हूँ, प्रलय हूँ, स्थान हूँ, निधान (आश्रय) हूँ और अविनाशी बीज हूँ।

English Translation

I am the goal, the sustainer, the Lord, the witness, the abode, the refuge, the friend, the origin, the dissolution, the foundation, the treasure, and the imperishable seed.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

यहाँ भगवान ने अपने अनेक रूपों का वर्णन किया है – वे ही सब कुछ हैं। इससे उनकी सर्वोच्चता और सर्वव्यापकता सिद्ध होती है।
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।