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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 9 · श्लोक 17

अध्याय 9 · श्लोक 17

राज विद्या राज गुह्य योग (Raja Vidya Raja Guhya Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

पिताहमस्य जगतो माता धाता पितामहः | वेद्यं पवित्रमोंकार ऋक्साम यजुरेव च || १७||

pitāham asya jagato mātā dhātā pitāmahaḥ | vedyaṃ pavitram oṃkāra ṛk sāma yajur eva ca ||17||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

पिता: पिता; अहम्: मैं; अस्य: इस; जगतः: जगत् का; माता: माता; धाता: धारण करने वाला; पितामहः: पितामह; वेद्यम्: जानने योग्य; पवित्रम्: पवित्र करने वाला; ओंकार: ओंकार; ऋक्: ऋग्वेद; साम: सामवेद; यजुः: यजुर्वेद; एव: ही; च: और।

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

मैं इस जगत् का पिता, माता, धाता (पालनकर्ता) और पितामह हूँ; मैं जानने योग्य हूँ, पवित्रकर्ता हूँ, ओंकार हूँ तथा ऋग्वेद, सामवेद और यजुर्वेद भी हूँ।

English Translation

I am the father, mother, supporter and grandfather of this universe; I am the object of knowledge, the purifier, the syllable OM, and also the Rik, Sama, and Yajur Vedas.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

भगवान सृष्टि के सम्बन्धों में भी व्याप्त हैं – पिता, माता, पालक, पितामह। वे वेदों के प्रतीक ओंकार तथा स्वयं तीनों वेद हैं।
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।