राज विद्या राज गुह्य योग (Raja Vidya Raja Guhya Yoga) – श्लोक 17
श्लोक १७ में भगवान सृष्टि के सभी रिश्तों और वेदों के स्वरूप के रूप में वर्णित हैं। Verse 17: The Lord is father, mother, grandfather, and the Vedas.
संस्कृत श्लोक
पिताहमस्य जगतो माता धाता पितामहः | वेद्यं पवित्रमोंकार ऋक्साम यजुरेव च || १७||
pitāham asya jagato mātā dhātā pitāmahaḥ | vedyaṃ pavitram oṃkāra ṛk sāma yajur eva ca ||17||
पदच्छेद / शब्दार्थ
पिता: पिता; अहम्: मैं; अस्य: इस; जगतः: जगत् का; माता: माता; धाता: धारण करने वाला; पितामहः: पितामह; वेद्यम्: जानने योग्य; पवित्रम्: पवित्र करने वाला; ओंकार: ओंकार; ऋक्: ऋग्वेद; साम: सामवेद; यजुः: यजुर्वेद; एव: ही; च: और।
हिंदी अनुवाद
मैं इस जगत् का पिता, माता, धाता (पालनकर्ता) और पितामह हूँ; मैं जानने योग्य हूँ, पवित्रकर्ता हूँ, ओंकार हूँ तथा ऋग्वेद, सामवेद और यजुर्वेद भी हूँ।
English Translation
I am the father, mother, supporter and grandfather of this universe; I am the object of knowledge, the purifier, the syllable OM, and also the Rik, Sama, and Yajur Vedas.
टीका / Commentary
भगवान सृष्टि के सम्बन्धों में भी व्याप्त हैं – पिता, माता, पालक, पितामह। वे वेदों के प्रतीक ओंकार तथा स्वयं तीनों वेद हैं।