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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 9 · श्लोक 16

अध्याय 9 · श्लोक 16

राज विद्या राज गुह्य योग (Raja Vidya Raja Guhya Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

अहं क्रतुरहं यज्ञः स्वधाहमहमौषधम् | मन्त्रोऽहमहमेवाज्यमहमग्निरहं हुतम् || १६||

ahaṃ kratur ahaṃ yajñaḥ svadhāham aham auṣadham | mantro 'ham aham evājyam aham agnir ahaṃ hutam ||16||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

अहम्: मैं; क्रतुः: क्रतु (वैदिक याग); अहम्: मैं; यज्ञः: यज्ञ; स्वधा: स्वधा (पितरों के लिए अन्न); अहम्: मैं; अहम्: मैं; औषधम्: औषधि; मन्त्रः: मन्त्र; अहम्: मैं; अहम्: मैं; एव: ही; आज्यम्: घी; अहम्: मैं; अग्निः: अग्नि; अहम्: मैं; हुतम्: हवन।

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

मैं क्रतु हूँ, मैं यज्ञ हूँ, मैं स्वधा (पितरों को दी जाने वाली वस्तु) हूँ, मैं औषधि हूँ, मैं मन्त्र हूँ, मैं आज्य (घी) हूँ, मैं अग्नि हूँ और मैं हवन हूँ।

English Translation

I am the ritual, I am the sacrifice, I am the offering to the ancestors, I am the herb, I am the mantra, I am the clarified butter, I am the fire, I am the oblation.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

यहाँ भगवान ने कहा है कि वे स्वयं सम्पूर्ण यज्ञीय प्रक्रिया के सभी अंग हैं। इससे यह भाव आता है कि यज्ञ कर्ता को भगवान की व्यापकता का बोध होना चाहिए।
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।