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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 9 · श्लोक 14

अध्याय 9 · श्लोक 14

राज विद्या राज गुह्य योग (Raja Vidya Raja Guhya Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

सततं कीर्तयन्तो मां यतन्तश्च दृढव्रताः | नमस्यन्तश्च मां भक्त्या नित्ययुक्ता उपासते || १४||

satataṃ kīrtayanto māṃ yatantaś ca dṛḍha-vratāḥ | namasyantaś ca māṃ bhaktyā nitya-yuktā upāsate ||14||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

सततम्: निरन्तर; कीर्तयन्तः: कीर्तन करते हुए; माम्: मेरा; यतन्तः: प्रयत्न करते हुए; च: और; दृढ-व्रताः: दृढ़ व्रत वाले; नमस्यन्तः: नमस्कार करते हुए; च: और; माम्: मुझे; भक्त्या: भक्ति से; नित्य-युक्ताः: नित्ययुक्त; उपासते: उपासना करते हैं।

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

निरन्तर मेरा कीर्तन करते हुए, दृढ़ व्रत वाले और यत्नशील होकर, तथा भक्तिपूर्वक मुझे नमस्कार करते हुए, वे नित्ययुक्त होकर मेरी उपासना करते हैं।

English Translation

Always chanting My glories, striving with firm resolve, and bowing down to Me with devotion, they are ever-engaged in My worship.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

महात्माओं के भक्ति के विभिन्न अंगों का वर्णन – कीर्तन, प्रयत्न, दृढ़ व्रत, नमस्कार, नित्ययुक्त होकर उपासना। यह नवधा भक्ति के कुछ अंग हैं।
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।