राज विद्या राज गुह्य योग (Raja Vidya Raja Guhya Yoga) – श्लोक 12

श्लोक १२ में उन लोगों के लक्षण बताए गए हैं जो भगवान को नहीं मानते। Verse 12: Characteristics of those who do not recognize the Lord.

संस्कृत श्लोक

मोघाशा मोघकर्माणो मोघज्ञाना विचेतसः | राक्षसीमासुरीं चैव प्रकृतिं मोहिनीं श्रिताः || १२||

moghāśā mogha-karmāṇo mogha-jñānā vicetasaḥ | rākṣasīm āsurīṃ caiva prakṛtiṃ mohinīṃ śritāḥ ||12||

पदच्छेद / शब्दार्थ

मोघ-आशाः: व्यर्थ आशा वाले; मोघ-कर्माणः: व्यर्थ कर्म वाले; मोघ-ज्ञानाः: व्यर्थ ज्ञान वाले; विचेतसः: विवेकहीन; राक्षसीम्: राक्षसी; आसुरीम्: आसुरी; च: और; एव: ही; प्रकृतिम्: प्रकृति; मोहिनीम्: मोहिनी (मोहित करने वाली); श्रिताः: आश्रित हुए।

हिंदी अनुवाद

वे व्यर्थ आशा, व्यर्थ कर्म, व्यर्थ ज्ञान वाले और विवेकहीन होते हैं, तथा राक्षसी और आसुरी मोहिनी प्रकृति को ही आश्रय किए रहते हैं।

English Translation

Those of vain hopes, vain actions, vain knowledge, and devoid of discrimination, are verily possessed of the delusive nature of demons and atheists.

टीका / Commentary

पिछले श्लोक में वर्णित मूढ़ों की विशेषता बताई गई है। उनकी सारी आशाएँ, कर्म और ज्ञान व्यर्थ होते हैं क्योंकि वे भगवान को नहीं पहचानते। वे आसुरी प्रवृत्ति के अधीन होते हैं।