राज विद्या राज गुह्य योग (Raja Vidya Raja Guhya Yoga) – श्लोक 11

श्लोक ११ में भगवान की मानवीय अवतार की अवहेलना करने वालों की निन्दा की गई है। Verse 11: Fools deride the Lord in human form.

संस्कृत श्लोक

अवजानन्ति मां मूढा मानुषीं तनुमाश्रितम् | परं भावमजानन्तो मम भूतमहेश्वरम् || ११||

avajānanti māṃ mūḍhā mānuṣīṃ tanum āśritam | paraṃ bhāvam ajānanto mama bhūta-maheśvaram ||11||

पदच्छेद / शब्दार्थ

अवजानन्ति: तिरस्कार करते हैं; माम्: मुझे; मूढाः: मूर्ख लोग; मानुषीम्: मनुष्य-रूपी; तनुम्: शरीर; आश्रितम्: धारण किए हुए; परम्: परम; भावम्: भाव (स्वरूप); अजानन्तः: न जानते हुए; मम: मेरा; भूत-महेश्वरम्: सम्पूर्ण प्राणियों का महान ईश्वर।

हिंदी अनुवाद

मूढ़ लोग मुझे मनुष्य रूप में धारण किये हुए (देखकर) तिरस्कार करते हैं। वे सम्पूर्ण भूतों के महेश्वर मेरे परम भाव को नहीं जानते।

English Translation

Fools disregard Me, thinking that I have assumed this human form, not knowing My supreme nature as the great Lord of all beings.

टीका / Commentary

जब भगवान साकार रूप में अवतार लेते हैं, तो अज्ञानी लोग उन्हें साधारण मनुष्य समझकर उनका अपमान करते हैं। वे यह नहीं जानते कि वही सबके स्वामी हैं।