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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 6 · श्लोक 7

अध्याय 6 · श्लोक 7

ध्यान योग (Dhyan Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

जितात्मनः प्रशान्तस्य परमात्मा समाहितः । शीतोष्णसुखदुःखेषु तथा मानापमानयोः ॥ ७॥

jitātmanaḥ praśāntasya paramātmā samāhitaḥ | śītoṣṇa-sukha-duḥkheṣu tathā mānāpamānayoḥ ||7||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

जितात्मनः: जीते हुए मन वाले; प्रशान्तस्य: शांत पुरुष के; परमात्मा: परमात्मा; समाहितः: सम्यक् रूप से स्थित; शीतोष्णसुखदुःखेषु: सर्दी-गर्मी, सुख-दुःख में; तथा: तथा; मानापमानयोः: मान-अपमान में।

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

जिसने मन को जीत लिया है और जो शान्त है, उसका परमात्मा में सम्यक् रूप से स्थित हो जाता है, वह शीत-उष्ण, सुख-दुःख तथा मान-अपमान में भी समान रहता है।

English Translation

For one who has conquered the mind and is tranquil, the Supreme Self is already attained. He remains unperturbed in cold and heat, pleasure and pain, honor and dishonor.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

जिसने मन को जीत लिया है, वह शांत हो जाता है और परमात्मा उसमें समाहित हो जाता है। ऐसा व्यक्ति सभी द्वंद्वों से ऊपर उठ जाता है।
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।