ध्यान योग (Dhyan Yoga) – श्लोक 7
श्लोक ७ में बताया गया है कि जितेन्द्रिय और शांत व्यक्ति सुख-दुःख आदि में समान रहता है।
संस्कृत श्लोक
जितात्मनः प्रशान्तस्य परमात्मा समाहितः । शीतोष्णसुखदुःखेषु तथा मानापमानयोः ॥ ७॥
jitātmanaḥ praśāntasya paramātmā samāhitaḥ | śītoṣṇa-sukha-duḥkheṣu tathā mānāpamānayoḥ ||7||
पदच्छेद / शब्दार्थ
जितात्मनः: जीते हुए मन वाले; प्रशान्तस्य: शांत पुरुष के; परमात्मा: परमात्मा; समाहितः: सम्यक् रूप से स्थित; शीतोष्णसुखदुःखेषु: सर्दी-गर्मी, सुख-दुःख में; तथा: तथा; मानापमानयोः: मान-अपमान में।
हिंदी अनुवाद
जिसने मन को जीत लिया है और जो शान्त है, उसका परमात्मा में सम्यक् रूप से स्थित हो जाता है, वह शीत-उष्ण, सुख-दुःख तथा मान-अपमान में भी समान रहता है।
English Translation
For one who has conquered the mind and is tranquil, the Supreme Self is already attained. He remains unperturbed in cold and heat, pleasure and pain, honor and dishonor.
टीका / Commentary
जिसने मन को जीत लिया है, वह शांत हो जाता है और परमात्मा उसमें समाहित हो जाता है। ऐसा व्यक्ति सभी द्वंद्वों से ऊपर उठ जाता है।