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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 6 · श्लोक 3

अध्याय 6 · श्लोक 3

ध्यान योग (Dhyan Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

आरुरुक्षोर्मुनेर्योगं कर्म कारणमुच्यते । योगारूढस्य तस्यैव शमः कारणमुच्यते ॥ ३॥

ārurukṣor muner yogaṃ karma kāraṇam ucyate | yogārūḍhasya tasyaiva śamaḥ kāraṇam ucyate ||3||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

आरुरुक्षोः: आरोहण की इच्छा रखने वाले; मुनेः: मुनि (योगी) के लिए; योगम्: योग में; कर्म: कर्म; कारणम्: साधन; उच्यते: कहा जाता है; योगारूढस्य: योग में आरूढ़ (स्थित) के लिए; तस्य: उसी; एव: ही; शमः: शम (सब क्रियाओं से उपराम); कारणम्: साधन; उच्यते: कहा जाता है।

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

योगारूढ़ होने की इच्छा वाले मुनि के लिए कर्म ही साधन कहा जाता है और योगारूढ़ (सिद्ध) के लिए शम (सब कर्मों से उपराम हो जाना) ही साधन कहा जाता है।

English Translation

For the sage who wishes to attain yoga, action is said to be the means; for the one who is already established in yoga, tranquility (cessation of all activities) is said to be the means.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

योग के आरंभिक चरण में कर्म करना आवश्यक है, लेकिन एक बार योग में स्थित हो जाने पर सभी क्रियाओं से शांत हो जाना चाहिए। कर्म ही साधन है और शांति ही साध्य।
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।