ध्यान योग (Dhyan Yoga) – श्लोक 23

श्लोक २३ में योग को दुःख-संयोग से मुक्ति बताया गया है।

संस्कृत श्लोक

तं विद्याद्दुःखसंयोगवियोगं योगसञ्ज्ञितम् । स निश्चयेन योक्तव्यो योगोऽनिर्विण्णचेतसा ॥ २३॥

taṃ vidyād duḥkha-saṃyoga-viyogaṃ yoga-sañjñitam | sa niścayena yoktavyo yogo 'nirviṇṇa-cetasā ||23||

पदच्छेद / शब्दार्थ

तम्: उसको; विद्यात्: जाने; दुःखसंयोगवियोगम्: दुःख के संयोग से वियोग (मुक्ति); योगसञ्ज्ञितम्: योग नामक; स: वह; निश्चयेन: निश्चय के साथ; योक्तव्यः: योग में लगना चाहिए; योगः: योग; अनिर्विण्णचेतसा: उदास मन से रहित होकर।

हिंदी अनुवाद

दुःख के संयोग से वियोग (छुटकारा) जो है, वही योग के नाम से जाना जाता है। उस योग का अभ्यास निश्चय के साथ और अनिर्विण्ण चित्त से (बिना खीझे) करना चाहिए।

English Translation

That state of disconnection from the union with sorrow is known as yoga. This yoga should be practiced with determination and without any despondency of mind.

टीका / Commentary

योग की परिभाषा: दुःखों के संयोग से अलग हो जाना। इसका अभ्यास निश्चय और उत्साह से करना चाहिए।