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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 6 · श्लोक 16

अध्याय 6 · श्लोक 16

ध्यान योग (Dhyan Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

नात्यश्नतस्तु योगोऽस्ति न चैकान्तमनश्नतः । न चाति स्वप्नशीलस्य जाग्रतो नैव चार्जुन ॥ १६॥

nātyaśnatas tu yogo 'sti na caikāntam anaśnataḥ | na cāti svapna-śīlasya jāgrato naiva cārjuna ||16||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

न: नहीं; अति अश्नतः: अधिक खाने वाले का; तु: तो; योगः: योग; अस्ति: होता है; न: नहीं; च: और; एकान्तम्: सर्वदा; अनश्नतः: न खाने वाले का; न: नहीं; च: और; अति: अधिक; स्वप्नशीलस्य: सोने वाले का; जाग्रतः: जागने वाले का; न: नहीं; एव: ही; च: और; अर्जुन: हे अर्जुन।

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

हे अर्जुन! न तो अधिक खाने वाले का योग सिद्ध होता है, न बिल्कुल न खाने वाले का; न अधिक सोने वाले का और न अधिक जागने वाले का।

English Translation

O Arjuna, verily yoga is not possible for one who eats too much, nor for one who does not eat at all; nor for one who sleeps too much, nor for one who stays awake (too much).

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

योग के मार्ग में संयम आवश्यक है – भोजन और नींद दोनों में अति नहीं करनी चाहिए।
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।