आज का पंचांग (Columbus) | सूर्योदय: ०४:२९ PM | सूर्यास्त: ०५:३३ AM
श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 6 · श्लोक 15

अध्याय 6 · श्लोक 15

ध्यान योग (Dhyan Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

युञ्जन्नेवं सदात्मानं योगी नियतमानसः । शान्तिं निर्वाणपरमां मत्संस्थामधिगच्छति ॥ १५॥

yuñjann evaṃ sadātmānaṃ yogī niyata-mānasaḥ | śāntiṃ nirvāṇa-paramāṃ mat-saṃsthām adhigacchati ||15||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

युञ्जन्: योग में लगाता हुआ; एवम्: इस प्रकार; सदा: सदा; आत्मानम्: अपने को; योगी: योगी; नियतमानसः: नियत (वश में किए) मन वाला; शान्तिम्: शान्ति; निर्वाणपरमाम्: परम निर्वाण रूप; मत्संस्थाम्: मुझमें स्थित; अधिगच्छति: प्राप्त होता है।

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

इस प्रकार सदा अपने मन को योग में लगाने वाला, नियत मन वाला योगी, मुझमें स्थित परम निर्वाण रूप शान्ति को प्राप्त होता है।

English Translation

Thus constantly engaging the mind in Me, the yogi of controlled mind attains the peace of Nirvana, which abides in Me.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

निरंतर अभ्यास से योगी परम शांति (निर्वाण) को प्राप्त करता है, जो भगवान में स्थित है।
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।