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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 6 · श्लोक 13

अध्याय 6 · श्लोक 13

ध्यान योग (Dhyan Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

समं कायशिरोग्रीवं धारयन्नचलं स्थिरः । सम्प्रेक्ष्य नासिकाग्रं स्वं दिशश्चानवलोकयन् ॥ १३॥

samaṃ kāya-śiro-grīvaṃ dhārayann acalaṃ sthiraḥ | samprekṣya nāsikāgraṃ svaṃ diśaś cānavalokayan ||13||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

समम्: सीधा, समभाव से; काय-शिरः-ग्रीवम्: शरीर, सिर और गर्दन को; धारयन्: धारण करता हुआ; अचलम्: स्थिर; स्थिरः: स्थिर; सम्प्रेक्ष्य: देखता हुआ; नासिकाग्रम्: नासिका के अग्रभाग को; स्वम्: अपने; दिशः: दिशाओं को; च: और; अनवलोकयन्: न देखता हुआ।

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

शरीर, सिर और गर्दन को सीधा एवं स्थिर रखते हुए, अपनी नासिका के अग्रभाग पर दृष्टि रखते हुए, इधर-उधर न देखता हुआ।

English Translation

Holding the body, head and neck erect and still, gaze fixed at the tip of the nose, without looking around.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

ध्यान की मुद्रा: शरीर, गर्दन और सिर सीधे रखें, दृष्टि नाक के अग्रभाग पर टिकाएं, और चारों ओर न देखें।
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।