ध्यान योग (Dhyan Yoga) – श्लोक 13
श्लोक १३ में ध्यान के समय शरीर की स्थिति का वर्णन है।
संस्कृत श्लोक
समं कायशिरोग्रीवं धारयन्नचलं स्थिरः । सम्प्रेक्ष्य नासिकाग्रं स्वं दिशश्चानवलोकयन् ॥ १३॥
samaṃ kāya-śiro-grīvaṃ dhārayann acalaṃ sthiraḥ | samprekṣya nāsikāgraṃ svaṃ diśaś cānavalokayan ||13||
पदच्छेद / शब्दार्थ
समम्: सीधा, समभाव से; काय-शिरः-ग्रीवम्: शरीर, सिर और गर्दन को; धारयन्: धारण करता हुआ; अचलम्: स्थिर; स्थिरः: स्थिर; सम्प्रेक्ष्य: देखता हुआ; नासिकाग्रम्: नासिका के अग्रभाग को; स्वम्: अपने; दिशः: दिशाओं को; च: और; अनवलोकयन्: न देखता हुआ।
हिंदी अनुवाद
शरीर, सिर और गर्दन को सीधा एवं स्थिर रखते हुए, अपनी नासिका के अग्रभाग पर दृष्टि रखते हुए, इधर-उधर न देखता हुआ।
English Translation
Holding the body, head and neck erect and still, gaze fixed at the tip of the nose, without looking around.
टीका / Commentary
ध्यान की मुद्रा: शरीर, गर्दन और सिर सीधे रखें, दृष्टि नाक के अग्रभाग पर टिकाएं, और चारों ओर न देखें।