ध्यान योग (Dhyan Yoga) – श्लोक 12
श्लोक १२ में ध्यान की विधि बताई गई है – आसन पर बैठकर एकाग्रता से योगाभ्यास।
संस्कृत श्लोक
तत्रैकाग्रं मनः कृत्वा यतचित्तेन्द्रियक्रियः । उपविश्यासने युञ्ज्याद्योगमात्मविशुद्धये ॥ १२॥
tatraikāgraṃ manaḥ kṛtvā yata-cittendriya-kriyaḥ | upaviśyāsane yuñjyād yogam ātma-viśuddhaye ||12||
पदच्छेद / शब्दार्थ
तत्र: वहाँ; एकाग्रम्: एकाग्र; मनः: मन को; कृत्वा: करके; यतचित्तेन्द्रियक्रियः: चित्त और इन्द्रियों की क्रियाओं को रोककर; उपविश्य: बैठकर; आसने: आसन पर; युञ्ज्यात्: योग का अभ्यास करे; योगम्: योग; आत्मविशुद्धये: आत्मा की शुद्धि के लिए।
हिंदी अनुवाद
वहाँ आसन पर बैठकर मन को एकाग्र करके, चित्त और इन्द्रियों की क्रियाओं को वश में करके, आत्मशुद्धि के लिए योग का अभ्यास करे।
English Translation
There, sitting on the seat, making the mind one-pointed, controlling the thoughts and the activities of the senses, one should practice yoga for self-purification.
टीका / Commentary
ध्यान की प्रक्रिया: आसन पर बैठकर, मन को एकाग्र करके, चित्त और इन्द्रियों को वश में करते हुए, आत्मशुद्धि के लिए योगाभ्यास करें।