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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 5 · श्लोक 5

अध्याय 5 · श्लोक 5

कर्मसंन्यास योग (Karma Sanyans Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

यत्सांख्यैः प्राप्यते स्थानं तद्योगैरपि गम्यते । एकं सांख्यं च योगं च यः पश्यति स पश्यति ॥ ५॥

yat sāṅkhyaiḥ prāpyate sthānaṃ tad yogair api gamyate | ekaṃ sāṅkhyaṃ ca yogaṃ ca yaḥ paśyati sa paśyati ||5||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

यत्: जो; सांख्यैः: सांख्ययोगियों (ज्ञानियों) द्वारा; प्राप्यते: प्राप्त किया जाता है; स्थानम्: पद; तत्: वही; योगैः: कर्मयोगियों द्वारा; अपि: भी; गम्यते: प्राप्त किया जाता है; एकम्: एक; सांख्यम्: सांख्य; च: और; योगम्: योग; च: और; यः: जो; पश्यति: देखता है; स: वह; पश्यति: (यथार्थ) देखता है।

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

सांख्ययोगियों (ज्ञानियों) द्वारा जो पद प्राप्त किया जाता है, वही कर्मयोगियों द्वारा भी प्राप्त होता है। जो सांख्य और योग को एक देखता है, वही यथार्थ देखता है।

English Translation

That place which is attained by the Sankhyas (jnana-yogis) is also reached by the yogis (karma-yogis). He who sees Sankhya and Yoga as one, truly sees.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

यह श्लोक पिछले श्लोक की पुष्टि करता है। दोनों मार्गों का लक्ष्य एक ही है – परब्रह्म की प्राप्ति। इस प्रकार ज्ञान और कर्म में कोई अंतर नहीं है।
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।