कर्मसंन्यास योग (Karma Sanyans Yoga) – श्लोक 6
श्लोक ६ में कृष्ण कहते हैं कि बिना कर्मयोग के केवल संन्यास लेना कठिन है; कर्मयोगी शीघ्र ब्रह्म को पा लेता है।
संस्कृत श्लोक
संन्यासस्तु महाबाहो दुःखमाप्तुमयोगतः । योगयुक्तो मुनिर्ब्रह्म नचिरेणाधिगच्छति ॥ ६॥
sannyāsas tu mahābāho duḥkham āptum ayogataḥ | yoga-yukto munir brahma na cireṇādhigacchati ||6||
पदच्छेद / शब्दार्थ
संन्यासः: संन्यास (कर्मों का त्याग); तु: तो; महाबाहो: हे महाबाहो; दुःखम्: कष्टपूर्वक; आप्तुम्: प्राप्त करने में; अयोगतः: कर्मयोग के बिना; योगयुक्तः: कर्मयोग में स्थित; मुनिः: मुनि; ब्रह्म: ब्रह्म को; नचिरेण: शीघ्र ही; अधिगच्छति: प्राप्त होता है।
हिंदी अनुवाद
हे महाबाहो! कर्मयोग के बिना (केवल) संन्यास (कर्मों का त्याग) प्राप्त करना कठिन है। किन्तु कर्मयोग में स्थित मुनि शीघ्र ही ब्रह्म को प्राप्त हो जाता है।
English Translation
O mighty-armed Arjuna, renunciation (sannyasa) is difficult to attain without karma-yoga. The sage who is united with karma-yoga attains Brahman quickly.
टीका / Commentary
बिना कर्मयोग के केवल कर्मों का त्याग करना कठिन है क्योंकि मन अभी भी आसक्तियों से भरा रहता है। कर्मयोगी धीरे-धीरे मन को शुद्ध करता है और शीघ्र ब्रह्म प्राप्ति कर लेता है।