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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 5 · श्लोक 6

अध्याय 5 · श्लोक 6

कर्मसंन्यास योग (Karma Sanyans Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

संन्यासस्तु महाबाहो दुःखमाप्तुमयोगतः । योगयुक्तो मुनिर्ब्रह्म नचिरेणाधिगच्छति ॥ ६॥

sannyāsas tu mahābāho duḥkham āptum ayogataḥ | yoga-yukto munir brahma na cireṇādhigacchati ||6||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

संन्यासः: संन्यास (कर्मों का त्याग); तु: तो; महाबाहो: हे महाबाहो; दुःखम्: कष्टपूर्वक; आप्तुम्: प्राप्त करने में; अयोगतः: कर्मयोग के बिना; योगयुक्तः: कर्मयोग में स्थित; मुनिः: मुनि; ब्रह्म: ब्रह्म को; नचिरेण: शीघ्र ही; अधिगच्छति: प्राप्त होता है।

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

हे महाबाहो! कर्मयोग के बिना (केवल) संन्यास (कर्मों का त्याग) प्राप्त करना कठिन है। किन्तु कर्मयोग में स्थित मुनि शीघ्र ही ब्रह्म को प्राप्त हो जाता है।

English Translation

O mighty-armed Arjuna, renunciation (sannyasa) is difficult to attain without karma-yoga. The sage who is united with karma-yoga attains Brahman quickly.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

बिना कर्मयोग के केवल कर्मों का त्याग करना कठिन है क्योंकि मन अभी भी आसक्तियों से भरा रहता है। कर्मयोगी धीरे-धीरे मन को शुद्ध करता है और शीघ्र ब्रह्म प्राप्ति कर लेता है।
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।