कर्मसंन्यास योग (Karma Sanyans Yoga) – श्लोक 28
श्लोक २८ में कहा गया है कि इस प्रकार ध्यान में स्थित मुनि सदा मुक्त है।
संस्कृत श्लोक
यतेन्द्रियमनोबुद्धिर्मुनिर्मोक्षपरायणः । विगतेच्छाभयक्रोधो यः सदा मुक्त एव सः ॥ २८॥
yatendriya-mano-buddhir munir mokṣa-parāyaṇaḥ | vigatecchā-bhaya-krodho yaḥ sadā mukta eva saḥ ||28||
पदच्छेद / शब्दार्थ
यतेन्द्रियमनोबुद्धिः: संयत इन्द्रिय, मन और बुद्धि वाला; मुनिः: मुनि; मोक्षपरायणः: मोक्ष परायण; विगतेच्छाभयक्रोधः: इच्छा, भय और क्रोध से रहित; यः: जो; सदा: सदा; मुक्त: मुक्त; एव: ही; सः: वह।
हिंदी अनुवाद
...इस प्रकार जो मुनि संयत इन्द्रिय, मन और बुद्धि वाला, मोक्ष-परायण, इच्छा, भय और क्रोध से रहित है, वह सदा के लिए मुक्त ही है।
English Translation
...with senses, mind, and intellect controlled, the sage intent on liberation, free from desire, fear, and anger – he is ever liberated.
टीका / Commentary
पिछले श्लोक में बताई गई ध्यान-विधि से साधक इन्द्रिय, मन और बुद्धि पर विजय पा लेता है। ऐसा मुनि, जो मोक्ष को ही परम लक्ष्य मानता है और इच्छा, भय, क्रोध से मुक्त है, वह सदा मुक्त ही है।