कर्मसंन्यास योग (Karma Sanyans Yoga) – श्लोक 26
श्लोक २६ में बताया गया है कि जो काम-क्रोध से मुक्त और आत्मज्ञानी हैं, उनके लिए मोक्ष सर्वत्र है।
संस्कृत श्लोक
कामक्रोधवियुक्तानां यतीनां यतचेतसाम् । अभितो ब्रह्मनिर्वाणं वर्तते विदितात्मनाम् ॥ २६॥
kāma-krodha-viyuktānāṃ yatīnāṃ yata-cetasām | abhito brahma-nirvāṇaṃ vartate viditātmanām ||26||
पदच्छेद / शब्दार्थ
कामक्रोधवियुक्तानाम्: काम और क्रोध से रहित; यतीनाम्: योगियों (संन्यासियों) के; यतचेतसाम्: संयत चित्त वाले; अभितः: सब ओर (निकट ही); ब्रह्मनिर्वाणम्: ब्रह्म-निर्वाण; वर्तते: स्थित है; विदितात्मनाम्: आत्मज्ञानियों के।
हिंदी अनुवाद
काम और क्रोध से रहित, संयत चित्त वाले, आत्मज्ञानी योगियों के लिए ब्रह्म-निर्वाण (मोक्ष) सब ओर (निकट ही) विद्यमान है।
English Translation
For those who are free from desire and anger, who have controlled their minds and known the Self, Brahmanirvana is near at hand (exists on all sides).
टीका / Commentary
जिन्होंने काम-क्रोध को जीत लिया है, मन को वश में कर लिया है, और आत्म-तत्त्व को जान लिया है, उनके लिए मोक्ष दूर नहीं, बल्कि सदा उपलब्ध है।