कर्मसंन्यास योग (Karma Sanyans Yoga) – श्लोक 24
श्लोक २४ में बताया गया है कि अन्तर्मुखी योगी ब्रह्मरूप होकर मोक्ष पाता है।
संस्कृत श्लोक
योऽन्तःसुखोऽन्तरारामस्तथान्तर्ज्योतिरेव यः । स योगी ब्रह्मनिर्वाणं ब्रह्मभूतोऽधिगच्छति ॥ २४॥
yo 'ntaḥ-sukho 'ntar-ārāmas tathāntar-jyotir eva yaḥ | sa yogī brahma-nirvāṇaṃ brahma-bhūto 'dhigacchati ||24||
पदच्छेद / शब्दार्थ
यः: जो; अन्तःसुखः: अन्तर में सुख वाला; अन्तरारामः: अन्तर में ही रमण करने वाला; तथा: तथा; अन्तर्ज्योतिः: अन्तर में ही ज्योति वाला; एव: ही; यः: जो; स: वह; योगी: योगी; ब्रह्मनिर्वाणम्: ब्रह्म-निर्वाण (मोक्ष) को; ब्रह्मभूतः: ब्रह्मरूप हुआ; अधिगच्छति: प्राप्त होता है।
हिंदी अनुवाद
जो पुरुष अन्तःकरण में ही सुख वाला है, अन्तर में ही रमण करने वाला है, और अन्तर में ही ज्योति वाला है, वह योगी ब्रह्मरूप होकर ब्रह्म-निर्वाण (मोक्ष) को प्राप्त होता है।
English Translation
He who finds his happiness within, his delight within, and his light within – that yogi, having become one with Brahman, attains Brahmanirvana (liberation in Brahman).
टीका / Commentary
जिसने अपने ही भीतर सुख, आनंद और प्रकाश पा लिया है, वह बाहरी वस्तुओं पर निर्भर नहीं रहता। ऐसा योगी ब्रह्ममय होकर मोक्ष प्राप्त करता है।