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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 5 · श्लोक 19

अध्याय 5 · श्लोक 19

कर्मसंन्यास योग (Karma Sanyans Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

इहैव तैर्जितः सर्गो येषां साम्ये स्थितं मनः । निर्दोषं हि समं ब्रह्म तस्माद्ब्रह्मणि ते स्थिताः ॥ १९॥

ihaiva tair jitaḥ sargo yeṣāṃ sāmye sthitaṃ manaḥ | nirdoṣaṃ hi samaṃ brahma tasmād brahmaṇi te sthitāḥ ||19||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

इह: इसी (लोक में); एव: ही; तैः: उनके द्वारा; जितः: जीत लिया गया; सर्गः: संसार (जन्म-मरण); येषाम्: जिनका; साम्ये: समता में; स्थितम्: स्थित; मनः: मन; निर्दोषम्: निर्दोष; हि: निश्चय ही; समम्: सम; ब्रह्म: ब्रह्म; तस्मात्: इसलिए; ब्रह्मणि: ब्रह्म में; ते: वे; स्थिताः: स्थित हैं।

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

जिनका मन समता में स्थित है, उन्होंने इसी लोक में संसार (जन्म-मरण) को जीत लिया है। ब्रह्म निर्दोष और सम है, इसलिए वे ब्रह्म में ही स्थित हैं।

English Translation

Even here (in this world), they have conquered the cycle of birth and death whose mind is established in equanimity. Brahman is flawless and equal; therefore they are established in Brahman.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

समदर्शी व्यक्ति इसी जीवन में मुक्त हो जाता है। ब्रह्म स्वयं सम और निर्दोष है, अतः जो समता में स्थित है, वह ब्रह्म में ही स्थित है।
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।