कर्मसंन्यास योग (Karma Sanyans Yoga) – श्लोक 16

श्लोक १६ में कहा गया है कि आत्मज्ञान से अज्ञान नष्ट होते ही परम तत्त्व प्रकट हो जाता है।

संस्कृत श्लोक

ज्ञानेन तु तदज्ञानं येषां नाशितमात्मनः । तेषामादित्यवज्ज्ञानं प्रकाशयति तत्परम् ॥ १६॥

jñānena tu tad ajñānaṃ yeṣāṃ nāśitam ātmanaḥ | teṣām āditya-vaj jñānaṃ prakāśayati tat param ||16||

पदच्छेद / शब्दार्थ

ज्ञानेन: ज्ञान द्वारा; तु: परन्तु; तत्: उस; अज्ञानम्: अज्ञान को; येषाम्: जिनका; नाशितम्: नष्ट कर दिया गया है; आत्मनः: अपने; तेषाम्: उनका; आदित्यवत्: सूर्य के समान; ज्ञानम्: ज्ञान; प्रकाशयति: प्रकाशित करता है; तत् परम्: उस परम तत्त्व को।

हिंदी अनुवाद

परन्तु जिन पुरुषों का वह अज्ञान आत्म-ज्ञान द्वारा नष्ट कर दिया गया है, उनका वह ज्ञान सूर्य के समान उस परम तत्त्व (ब्रह्म) को प्रकाशित कर देता है।

English Translation

But to those whose ignorance is destroyed by the knowledge of the Self, that knowledge, like the sun, reveals the Supreme (Brahman).

टीका / Commentary

जब अज्ञान आत्म-ज्ञान से नष्ट हो जाता है, तब ज्ञान स्वतः ही परमात्मा के दर्शन करा देता है, जैसे सूर्य उदय होने पर सब कुछ प्रकाशित हो जाता है।