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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 5 · श्लोक 16

अध्याय 5 · श्लोक 16

कर्मसंन्यास योग (Karma Sanyans Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

ज्ञानेन तु तदज्ञानं येषां नाशितमात्मनः । तेषामादित्यवज्ज्ञानं प्रकाशयति तत्परम् ॥ १६॥

jñānena tu tad ajñānaṃ yeṣāṃ nāśitam ātmanaḥ | teṣām āditya-vaj jñānaṃ prakāśayati tat param ||16||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

ज्ञानेन: ज्ञान द्वारा; तु: परन्तु; तत्: उस; अज्ञानम्: अज्ञान को; येषाम्: जिनका; नाशितम्: नष्ट कर दिया गया है; आत्मनः: अपने; तेषाम्: उनका; आदित्यवत्: सूर्य के समान; ज्ञानम्: ज्ञान; प्रकाशयति: प्रकाशित करता है; तत् परम्: उस परम तत्त्व को।

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

परन्तु जिन पुरुषों का वह अज्ञान आत्म-ज्ञान द्वारा नष्ट कर दिया गया है, उनका वह ज्ञान सूर्य के समान उस परम तत्त्व (ब्रह्म) को प्रकाशित कर देता है।

English Translation

But to those whose ignorance is destroyed by the knowledge of the Self, that knowledge, like the sun, reveals the Supreme (Brahman).

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

जब अज्ञान आत्म-ज्ञान से नष्ट हो जाता है, तब ज्ञान स्वतः ही परमात्मा के दर्शन करा देता है, जैसे सूर्य उदय होने पर सब कुछ प्रकाशित हो जाता है।
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।