ज्ञान कर्म संन्यास योग (Gyan Karma Sanyas Yoga) – श्लोक 9

श्लोक ९ में कृष्ण कहते हैं कि जो उनके दिव्य जन्म-कर्म को तत्त्व से जान लेता है, वह मोक्ष को प्राप्त होता है।

संस्कृत श्लोक

जन्म कर्म च मे दिव्यमेवं यो वेत्ति तत्त्वतः | त्यक्त्वा देहं पुनर्जन्म नैति मामेति सोऽर्जुन ||९||

janma karma ca me divyam evaṃ yo vetti tattvataḥ | tyaktvā dehaṃ punarjanma naiti mām eti so 'rjuna ||9||

पदच्छेद / शब्दार्थ

जन्म: जन्म; कर्म: कर्म; च: और; मे: मेरे; दिव्यम्: दिव्य; एवम्: इस प्रकार; यः: जो; वेत्ति: जानता है; तत्त्वतः: तत्त्व से; त्यक्त्वा: त्यागकर; देहम्: शरीर को; पुनर्जन्म: पुनर्जन्म; न: नहीं; एति: पाता; माम्: मुझको; एति: प्राप्त होता है; सः: वह; अर्जुन: हे अर्जुन।

हिंदी अनुवाद

हे अर्जुन! जो मेरे दिव्य जन्म और कर्मों को इस प्रकार तत्त्व से जान लेता है, वह शरीर त्यागने के बाद पुनर्जन्म को नहीं प्राप्त होता, बल्कि मुझको ही प्राप्त होता है।

English Translation

He who thus knows, in true light, My divine birth and actions, after leaving the body, is not born again; he comes to Me, O Arjuna.

टीका / Commentary

ईश्वर के दिव्य जन्म और कर्मों को यथार्थ रूप से जानने का फल – मोक्ष। जो यह समझ लेता है कि कृष्ण का जन्म और कर्म साधारण नहीं, बल्कि दिव्य हैं, वह जन्म-मृत्यु के चक्र से मुक्त हो जाता है।