ज्ञान कर्म संन्यास योग (Gyan Karma Sanyas Yoga) – श्लोक 5

श्लोक ५ में कृष्ण कहते हैं कि उनके और अर्जुन के अनेक जन्म हो चुके हैं, जिन्हें वे जानते हैं, पर अर्जुन नहीं।

संस्कृत श्लोक

श्रीभगवानुवाच | बहूनि मे व्यतीतानि जन्मानि तव चार्जुन | तान्यहं वेद सर्वाणि न त्वं वेत्थ परन्तप ||५||

śrī-bhagavān uvāca | bahūni me vyatītāni janmāni tava cārjuna | tāny ahaṃ veda sarvāṇi na tvaṃ vettha parantapa ||5||

पदच्छेद / शब्दार्थ

श्रीभगवान्: भगवान; उवाच: बोले; बहूनि: अनेक; मे: मेरे; व्यतीतानि: बीत चुके हैं; जन्मानि: जन्म; तव: तुम्हारे; च: और; अर्जुन: हे अर्जुन; तानि: उनको; अहम्: मैं; वेद: जानता हूँ; सर्वाणि: सभी; न: नहीं; त्वम्: तुम; वेत्थ: जानते हो; परन्तप: हे परन्तप।

हिंदी अनुवाद

श्रीभगवान् बोले: हे अर्जुन! मेरे और तुम्हारे अनेक जन्म बीत चुके हैं। उन सबको मैं जानता हूँ, परन्तु हे परन्तप! तुम नहीं जानते।

English Translation

The Blessed Lord said: Many births of Mine have passed, as well as of yours, O Arjuna. I know them all, but you do not know, O scorcher of foes.

टीका / Commentary

कृष्ण यहाँ आत्मा की पुनर्जन्म की यात्रा और ईश्वर की सर्वज्ञता का रहस्य बता रहे हैं। जहाँ साधारण जीव अपने पिछले जन्मों को भूल जाता है, वहीं ईश्वर को सब ज्ञात रहता है। यह कृष्ण के दिव्य स्वरूप का प्रथम संकेत है।