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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 4 · श्लोक 4

अध्याय 4 · श्लोक 4

ज्ञान कर्म संन्यास योग (Gyan Karma Sanyas Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

अर्जुन उवाच | अपरं भवतो जन्म परं जन्म विवस्वतः | कथमेतद्विजानीयां त्वमादौ प्रोक्तवानिति ||४||

arjuna uvāca | aparaṃ bhavato janma paraṃ janma vivasvataḥ | katham etad vijānīyāṃ tvam ādau proktavān iti ||4||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

अर्जुन: अर्जुन; उवाच: बोले; अपरम्: बाद का; भवतः: आपका; जन्म: जन्म; परम्: पहले का; जन्म: जन्म; विवस्वतः: विवस्वान् (सूर्य) का; कथम्: कैसे; एतत्: यह; विजानीयाम्: जानूँ; त्वम्: आपने; आदौ: आदि में; प्रोक्तवान्: कहा था; इति: इस प्रकार।

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

अर्जुन बोले: आपका जन्म तो बाद में हुआ और विवस्वान् (सूर्य) का जन्म पहले। जो आपने आदि में कहा था, उसे मैं कैसे समझूँ?

English Translation

Arjuna said: Later was Your birth, and prior to it was the birth of Vivasvan (the Sun). How am I to understand that You taught this yoga in the beginning?

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

अर्जुन को संदेह होता है। कृष्ण का जन्म तो हाल का है (लगभग ५००० वर्ष पूर्व), जबकि सूर्य देव तो अनादि काल से हैं। कृष्ण यह कैसे कह सकते हैं कि उन्होंने सूर्य को यह योग सिखाया था? यह संदेह कृष्ण के दिव्य स्वरूप को समझने में अर्जुन की असमर्थता को दर्शाता है।
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।