ज्ञान कर्म संन्यास योग (Gyan Karma Sanyas Yoga) – श्लोक 3

श्लोक ३ में कृष्ण अर्जुन को बताते हैं कि वही प्राचीन योग आज उन्हें दिया जा रहा है, क्योंकि वे भक्त और मित्र हैं।

संस्कृत श्लोक

स एवायं मया तेऽद्य योगः प्रोक्तः पुरातनः | भक्तोऽसि मे सखा चेति रहस्यं ह्येतदुत्तमम् ||३||

sa evāyaṃ mayā te 'dya yogaḥ proktaḥ purātanaḥ | bhakto 'si me sakhā ceti rahasyaṃ hy etad uttamam ||3||

पदच्छेद / शब्दार्थ

सः: वही; एव: निश्चय ही; अयम्: यह; मया: मेरे द्वारा; ते: तुमसे; अद्य: आज; योगः: योग; प्रोक्तः: कहा गया; पुरातनः: प्राचीन; भक्तः: भक्त; असि: हो; मे: मेरा; सखा: मित्र; च: और; इति: इसलिए; रहस्यम्: रहस्य; हि: निश्चय ही; एतत्: यह; उत्तमम्: उत्तम।

हिंदी अनुवाद

वही यह प्राचीन योग आज मेरे द्वारा तुमसे कहा गया है, क्योंकि तुम मेरे भक्त और मित्र हो। यह उत्तम रहस्य है।

English Translation

That same ancient yoga has been today taught to you by Me, for you are My devotee and My friend; it is the supreme secret.

टीका / Commentary

कृष्ण अर्जुन को विशेषाधिकार बताते हैं कि वही प्राचीन योग आज उन्हें दिया जा रहा है। इसका कारण है – अर्जुन उनके भक्त और मित्र हैं। यहाँ भक्ति और मित्रता दोनों को ज्ञान प्राप्ति के लिए आधार बताया गया है।