ज्ञान कर्म संन्यास योग (Gyan Karma Sanyas Yoga) – श्लोक 39
श्लोक ३९ में ज्ञान प्राप्ति के लिए श्रद्धा, तत्परता और इन्द्रिय-संयम की आवश्यकता बताई गई है।
संस्कृत श्लोक
श्रद्धावाँल्लभते ज्ञानं तत्परः संयतेन्द्रियः । ज्ञानं लब्ध्वा परां शान्तिमचिरेणाधिगच्छति ॥ ३९ ॥
śraddhāvāṃl labhate jñānaṃ tat-paraḥ saṃyatendriyaḥ | jñānaṃ labdhvā parāṃ śāntim acireṇādhigacchati ||39||
पदच्छेद / शब्दार्थ
श्रद्धावान्: श्रद्धालु; लभते: प्राप्त करता है; ज्ञानम्: ज्ञान; तत्परः: उसमें तत्पर; संयतेन्द्रियः: संयमित इन्द्रियों वाला; ज्ञानम्: ज्ञान; लब्ध्वा: प्राप्त करके; पराम्: परम; शान्तिम्: शान्ति; अचिरेण: शीघ्र; अधिगच्छति: प्राप्त होता है।
हिंदी अनुवाद
श्रद्धालु, उसमें (ज्ञान में) तत्पर और संयमित इन्द्रियों वाला पुरुष ज्ञान प्राप्त करता है। ज्ञान प्राप्त करके वह शीघ्र ही परम शान्ति को प्राप्त हो जाता है।
English Translation
A man of faith, devoted to it, and having subdued his senses, attains knowledge. Having attained knowledge, he soon attains supreme peace.
टीका / Commentary
ज्ञान प्राप्ति के लिए तीन शर्तें हैं—श्रद्धा (विश्वास), तत्परता (निष्ठा), और संयतेन्द्रियता (इन्द्रिय-निग्रह)। श्रद्धा के बिना ज्ञान टिकाऊ नहीं होता। तत्परता के बिना प्रयास निरन्तर नहीं रहता। इन्द्रिय-संयम के बिना मन भटकता रहता है। इन तीनों से युक्त साधक ज्ञान प्राप्त करता है और फिर शीघ्र ही परम शान्ति (मोक्ष) को प्राप्त होता है।