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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 4 · श्लोक 24

अध्याय 4 · श्लोक 24

ज्ञान कर्म संन्यास योग (Gyan Karma Sanyas Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

ब्रह्मार्पणं ब्रह्म हविर्ब्रह्माग्नौ ब्रह्मणा हुतम् | ब्रह्मैव तेन गन्तव्यं ब्रह्मकर्मसमाधिना ||२४||

brahmārpaṇaṃ brahma havir brahmāgnau brahmaṇā hutam | brahmaiva tena gantavyaṃ brahma-karma-samādhinā ||24||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

ब्रह्म: ब्रह्म; अर्पणम्: अर्पण करने की क्रिया; ब्रह्म: ब्रह्म; हविः: हवि (आहुति); ब्रह्माग्नौ: ब्रह्मरूपी अग्नि में; ब्रह्मणा: ब्रह्म द्वारा; हुतम्: हवन किया गया; ब्रह्म: ब्रह्म; एव: ही; तेन: उसके द्वारा; गन्तव्यम्: प्राप्त करने योग्य; ब्रह्मकर्मसमाधिना: ब्रह्म में कर्म की समाधि (एकता) रखने वाले।

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

अर्पण करने की क्रिया ब्रह्म है, हवि (आहुति) ब्रह्म है, ब्रह्मरूपी अग्नि में ब्रह्म द्वारा हवन किया गया है – इस प्रकार ब्रह्म में कर्म की समाधि (एकता) रखने वाले उस (पुरुष) द्वारा ब्रह्म ही प्राप्त करने योग्य है।

English Translation

Brahman is the oblation; Brahman is the melted butter (ghee); by Brahman is the oblation poured into the fire of Brahman; Brahman indeed shall be attained by one who always sees Brahman in action.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

यह श्लोक अद्वैत भाव से कर्म करने का सर्वोच्च स्तर है। कर्ता, कर्म, क्रिया, साधन, फल – सब ब्रह्म ही हैं। ऐसी भावना से कर्म करने वाला ब्रह्म को ही प्राप्त होता है।
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।