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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 4 · श्लोक 19

अध्याय 4 · श्लोक 19

ज्ञान कर्म संन्यास योग (Gyan Karma Sanyas Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

यस्य सर्वे समारम्भाः कामसङ्कल्पवर्जिताः | ज्ञानाग्निदग्धकर्माणं तमाहुः पण्डितं बुधाः ||१९||

yasya sarve samārambhāḥ kāma-saṅkalpa-varjitāḥ | jñānāgni-dagdha-karmāṇaṃ tam āhuḥ paṇḍitaṃ budhāḥ ||19||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

यस्य: जिसके; सर्वे: सब; समारम्भाः: आरम्भ (प्रयास); कामसङ्कल्पवर्जिताः: कामना और संकल्प से रहित; ज्ञानाग्निदग्धकर्माणम्: ज्ञानरूपी अग्नि से दग्ध (जले) कर्म वाले; तम्: उसे; आहुः: कहते हैं; पण्डितम्: पण्डित; बुधाः: ज्ञानी लोग।

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

जिसके सब आरम्भ (प्रयास) कामना और संकल्प से रहित हैं, और जिसके कर्म ज्ञानरूपी अग्नि से दग्ध (जले) हो गए हैं, उसे ज्ञानी लोग पण्डित (ज्ञानी) कहते हैं।

English Translation

He whose undertakings are all devoid of desires and selfish purposes, and whose actions have been burned by the fire of knowledge, the wise call him a sage.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

ज्ञानी की पहचान – उसके सभी प्रयास कामना और संकल्प से रहित होते हैं। ज्ञानाग्निदग्धकर्म का अर्थ है कि उसके कर्म ज्ञान की अग्नि में जलकर भस्म हो गए हैं, अर्थात उनका कोई बंधनकारी फल नहीं बचता।
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।