ज्ञान कर्म संन्यास योग (Gyan Karma Sanyas Yoga) – श्लोक 15
श्लोक १५ में कृष्ण कहते हैं कि पूर्वज मुमुक्षुओं ने भी यही जानकर कर्म किया, इसलिए तू भी कर।
संस्कृत श्लोक
एवं ज्ञात्वा कृतं कर्म पूर्वैरपि मुमुक्षुभिः | कुरु कर्मैव तस्मात्त्वं पूर्वैः पूर्वतरं कृतम् ||१५||
evaṃ jñātvā kṛtaṃ karma pūrvair api mumukṣubhiḥ | kuru karmaiva tasmāt tvaṃ pūrvaiḥ pūrvataraṃ kṛtam ||15||
पदच्छेद / शब्दार्थ
एवम्: इस प्रकार; ज्ञात्वा: जानकर; कृतम्: किया गया; कर्म: कर्म; पूर्वैः: पूर्वजों द्वारा; अपि: भी; मुमुक्षुभिः: मुमुक्षुओं (मोक्ष की इच्छा रखने वालों) द्वारा; कुरु: कर; कर्म: कर्म; एव: ही; तस्मात्: इसलिए; त्वम्: तू; पूर्वैः: पूर्वजों द्वारा; पूर्वतरम्: पहले; कृतम्: किया गया।
हिंदी अनुवाद
इस प्रकार जानकर, पूर्वज मुमुक्षुओं (मोक्ष की इच्छा रखने वालों) ने भी कर्म किया है। इसलिए तू भी वैसा कर्म कर, जैसा पूर्वजों ने पहले किया था।
English Translation
Having known this, the ancient seekers of freedom also performed action; therefore, do you also perform action, as the ancients did in days of yore.
टीका / Commentary
कृष्ण ऐतिहासिक उदाहरण देते हैं। जिन पूर्वजों ने मोक्ष की इच्छा रखी, उन्होंने भी यही मार्ग अपनाया – फलासक्ति रहित होकर कर्म किया। इसलिए अर्जुन को भी उसी मार्ग पर चलना चाहिए।