ज्ञान कर्म संन्यास योग (Gyan Karma Sanyas Yoga) – श्लोक 13

श्लोक १३ में कृष्ण चार वर्णों के निर्माण का आधार बताते हैं – गुण और कर्म।

संस्कृत श्लोक

चातुर्वर्ण्यं मया सृष्टं गुणकर्मविभागशः | तस्य कर्तारमपि मां विद्ध्यकर्तारमव्ययम् ||१३||

cātur-varṇyaṃ mayā sṛṣṭaṃ guṇa-karma-vibhāgaśaḥ | tasya kartāram api māṃ viddhy akartāram avyayam ||13||

पदच्छेद / शब्दार्थ

चातुर्वर्ण्यम्: चार वर्णों की व्यवस्था; मया: मेरे द्वारा; सृष्टम्: रची गई; गुणकर्मविभागशः: गुणों और कर्मों के विभाग से; तस्य: उसका; कर्तारम्: कर्ता; अपि: भी; माम्: मुझको; विद्धि: जानो; अकर्तारम्: अकर्ता; अव्ययम्: अविनाशी।

हिंदी अनुवाद

गुणों और कर्मों के विभाग के अनुसार चार वर्णों की रचना मेरे द्वारा की गई है। उस (व्यवस्था) का कर्ता होते हुए भी मुझे अकर्ता और अविनाशी जानो।

English Translation

The fourfold caste has been created by Me according to the differentiation of Guna and Karma; though I am the author of it, know Me as non-doer and immutable.

टीका / Commentary

कृष्ण वर्णव्यवस्था के आधार को स्पष्ट करते हैं। यह व्यवस्था जन्म पर आधारित नहीं, बल्कि गुण (प्रकृति) और कर्म (कार्य) पर आधारित है। और महत्वपूर्ण बात – ईश्वर इस व्यवस्था का निर्माता होते हुए भी उससे लिप्त नहीं होते; वे अकर्ता और अविनाशी हैं।