आज का पंचांग (Columbus) | सूर्योदय: ०४:२९ PM | सूर्यास्त: ०५:३३ AM
श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 3 · श्लोक 6

अध्याय 3 · श्लोक 6

कर्म योग (Karma Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

कर्मेन्द्रियाणि संयम्य य आस्ते मनसा स्मरन् | इन्द्रियार्थान्विमूढात्मा मिथ्याचारः स उच्यते ||६||

karmendriyāṇi saṃyamya ya āste manasā smaran | indriyārthān vimūḍhātmā mithyācāraḥ sa ucyate ||6||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

कर्मेन्द्रियाणि: कर्मेन्द्रियों को; संयम्य: रोककर; य: जो; आस्ते: बैठा है; मनसा: मन से; स्मरन्: स्मरण करता हुआ; इन्द्रियार्थान्: इन्द्रियों के विषयों को; विमूढात्मा: मूढ़ बुद्धि वाला; मिथ्याचार: ढोंगी, पाखण्डी; स: वह; उच्यते: कहलाता है।

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

जो कर्मेन्द्रियों को तो रोक लेता है, किन्तु मन से इन्द्रियों के विषयों का चिन्तन करता रहता है, वह मूढ़ात्मा (धोखेबाज) मिथ्याचारी कहलाता है।

English Translation

One who restrains the senses of action but mentally dwells on the sense objects – such a deluded soul is called a hypocrite.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

बाहरी त्याग का कोई मूल्य नहीं यदि मन भोगों में लगा हो। सच्चा संन्यासी वह है जिसने मन को भी वश में किया हो। External renunciation is worthless if the mind is still attached to sense objects. True renunciation is when the mind is also controlled.
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।