कर्म योग (Karma Yoga) – श्लोक 36
श्लोक ३६ में अर्जुन पूछते हैं कि मनुष्य अनिच्छा से भी पाप क्यों करता है। Verse 36: Arjuna asks what impels a person to sin, even unwillingly.
संस्कृत श्लोक
अर्जुन उवाच | अथ केन प्रयुक्तोऽयं पापं चरति पूरुषः | अनिच्छन्नपि वार्ष्णेय बलादिव नियोजितः ||३६||
arjuna uvāca | atha kena prayukto'yaṃ pāpaṃ carati pūruṣaḥ | anicchann api vārṣṇeya balād iva niyojitaḥ ||36||
पदच्छेद / शब्दार्थ
अर्जुन: अर्जुन; उवाच: बोले; अथ: अब; केन: किसके द्वारा; प्रयुक्त: प्रेरित होकर; अयम्: यह; पापम्: पाप; चरति: करता है; पूरुष: मनुष्य; अनिच्छन्: न चाहता हुआ; अपि: भी; वार्ष्णेय: हे वार्ष्णेय (कृष्ण); बलात्: बलपूर्वक; इव: मानो; नियोजित: लगाया गया।
हिंदी अनुवाद
अर्जुन बोले: हे वार्ष्णेय! फिर किसके द्वारा प्रेरित होकर यह मनुष्य पाप करता है, अनिच्छा से भी, मानो बलपूर्वक लगाया गया हो?
English Translation
Arjuna said: O Varshneya, what impels a person to commit sin, even against his will, as if driven by force?
टीका / Commentary
अर्जुन अब एक गूढ़ प्रश्न पूछते हैं – यदि मनुष्य जानता है कि यह पाप है, फिर भी वह पाप क्यों करता है? इसका उत्तर आगे दिया जाएगा। Arjuna now asks a profound question – why does a person commit sin even against their will? The answer follows.