कर्म योग (Karma Yoga) – श्लोक 37

श्लोक ३७ में भगवान बताते हैं कि काम और क्रोध ही शत्रु हैं। Verse 37: The Lord says desire and anger are the enemies.

संस्कृत श्लोक

श्रीभगवानुवाच | काम एष क्रोध एष रजोगुणसमुद्भवः | महाशनो महापाप्मा विद्ध्येनमिह वैरिणम् ||३७||

śrībhagavān uvāca | kāma eṣa krodha eṣa rajoguṇasamudbhavaḥ | mahāśano mahāpāpmā viddhy enam iha vairiṇam ||37||

पदच्छेद / शब्दार्थ

श्रीभगवान्: भगवान; उवाच: बोले; काम: काम; एष: यह; क्रोध: क्रोध; एष: यह; रजोगुणसमुद्भव: रजोगुण से उत्पन्न; महाशन: महान भक्षक (अतृप्त); महापाप्मा: महान पापी; विद्धि: जानो; एनम्: इसे; इह: इस संसार में; वैरिणम्: शत्रु।

हिंदी अनुवाद

श्रीभगवान् बोले: यह काम और यह क्रोध, जो रजोगुण से उत्पन्न हैं, महान भक्षक (अतृप्त) और महापापी हैं। इसे ही इस (संसार) में शत्रु जान।

English Translation

The Blessed Lord said: It is desire (kāma) and anger (krodha), born of the rajo-guṇa, which are the great devourers and great sinners. Know these to be the enemy here.

टीका / Commentary

भगवान उत्तर देते हैं – यह काम और क्रोध ही मनुष्य को पाप की ओर प्रेरित करते हैं। ये रजोगुण से उत्पन्न होते हैं और आत्मा के शत्रु हैं। The Lord answers – it is desire and anger, born of rajas, that impel a person to sin. They are the enemies of the soul.